परिचय
हित ध्रुवदास जी भक्तिकाल की राधावल्लभ संप्रदाय परंपरा के अत्यंत मूर्धन्य और प्रचुर रचनाकार संत-कवि थे। वे गोस्वामी हित हरिवंश महाप्रभु जी के प्रमुख शिष्य परंपरा से जुड़े थे और उन्होंने अपनी वाणी में निकुंज-उपासना को शीर्ष स्थान दिया। इनकी रचनाओं में श्री राधा-कृष्ण के नित्य विहार, युगल सौंदर्य, रूप-माधुरी और सखी भाव की अत्यंत गूढ़ व रससिक्त अनुभूति मिलती है। 'बयालीस लीला' जैसे अमर ग्रंथों के माध्यम से ध्रुवदास जी ने ब्रजभाषा काव्य में भक्ति और श्रृंगार का अद्वितीय संगम प्रस्तुत किया।
ध्रुवदास जी की प्रमुख रचनाएँ, पद व सवैये
- ध्रुवदास के दोहे / Dhruvdas ke Dohe
- ध्रुवदास के पद / Dhruvdas ke Pad
- ध्रुवदास के सवैया / Dhruvdas ke Savaiya
- राधा बल्लभ लाल की प्यारी / ध्रुवदास
- भीजी नवेली चँवेली फुलेल सों / ध्रुवदास
- रहे चकि लाल चितौ मुख बाल / ध्रुवदास
- ऐसी करी नवलाल रँगीले जू / ध्रुवदास
- सेज सरोवर राजत है जल मादिक / ध्रुवदास
- ध्रुवदास के कवित्त / Dhruvdas ke Kavit
- हँसनि में फूलनि की चाहनि में अमृत की / ध्रुवदास
- जैसी अलबेली बाल तैसे अलबेले लाल / ध्रुवदास
- रूप बन प्यारी तन मौर्यौ है यौवन तहाँ / ध्रुवदास
- डीठि हू को भार जानि देखत न डीठि भरि / ध्रुवदास
- अलबेली सुकुमारी नैननि के आगे रहै / ध्रुवदास
- प्रानहू ते प्यारी सुकुमारी जू को देखत / ध्रुवदास
- नवल नबेली अलबेली सुकुमारी जू को / ध्रुवदास
- छबि ठाढ़ी कर जोरैं / ध्रुवदास
- नैनन के आगे प्यारी बिलपत है बिहारी / ध्रुवदास
- कुंजतें निकसु दोऊ ठाढ़े जमुना के तीर / ध्रुवदास
- दुलहिन दूलहु कुँवर दोऊ सहज ही / ध्रुवदास
- रूप की सी फुलवारी फूलि रही सुकुमारी / ध्रुवदास
- प्यारे जू की जीवन है नवल किशोरी गोरी / ध्रुवदास
- नई सेज नई रुचि नयो रूप नयो नेह / ध्रुवदास
- फूलनि की कुंज ऐन फूलनि की रची सैन / ध्रुवदास
- प्रीतम की प्रेम गति देखै भूली तन गति / ध्रुवदास
- आजु की छबीली छबि / ध्रुवदास
- आछी छबि सों छबीले सों छबीले बैठे / ध्रुवदास
- सेज रँगीली रँगीली सखीन री / ध्रुवदास
- सखीनी की गति हेरैं ठाड़े भये जाइ नेरे / ध्रुवदास
- सहज सुभाउ पर्यौ / ध्रुवदास
- ध्रुवदास की कुंडलियाँ / Dhruvdas ki Kundliyan
- हंस सुता तट बिहरिबो / ध्रुवदास
- प्रेमहि शील सुभाव नित / ध्रुवदास
- मदन केलि को खेलि है / ध्रुवदास
- बार-बार तो बनत नहिं / ध्रुवदास
- श्री राधाबल्लभ लाल की / ध्रुवदास
- वृंदा बिपिन निमित्त गहि / ध्रुवदास
- श्री राधाबल्लभ लाड़िली / ध्रुवदास
- ऐसे हिय में बसत रहौ / ध्रुवदास
- बृंदाबिपिन निमित्त है / ध्रुवदास
- बार-बार तो बनत नहिं (2) / ध्रुवदास
- बहु-बहु बीती, थोरी रहीं / ध्रुवदास
- हंस-सुता-तट बिहारिबौ / ध्रुवदास
- सीस फूल झलकान छबि / ध्रुवदास
- ध्रुवदास की चौपाई / Dhruvdas ki Chaupayi
- प्रेम-कथा कछु कही न जाई / ध्रुवदास
- मेंड़ तोरि रस चल्यौ अपारा / ध्रुवदास
- जीव-दसा कछु इक सुनु भाई / ध्रुवदास
- बृंदावन घन राजत कुंजै / ध्रुवदास
- कौन प्रेम तिहि ठाँकौ कहिए / ध्रुवदास
- खान पान सुख चाहत अपने / ध्रुवदास
- महाप्रेम गति सब तें न्यारी / ध्रुवदास
- ध्रुवदास का सोरठा / Dhruvdas ka Sortha
- भक्तन सों अभिमान / ध्रुवदास
- तब पावै रस सार / ध्रुवदास
- तृन-सम जब है जाहिं / ध्रुवदास
- जीवन परिचय / ध्रुवदास