परिचय
चतुर्भुजदास जी भक्तिकाल की पुष्टिमार्गीय परंपरा के प्रतिष्ठित कवि और अष्टछाप के प्रमुख कवियों में से एक थे। वे अष्टछाप के प्रसिद्ध कवि कुंभनदास जी के कनिष्ठ पुत्र तथा गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के कृपापात्र शिष्य थे। इनकी रचनाओं में भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, गोचारण, वात्सल्य और राधा-कृष्ण के युगल प्रेम का अत्यंत सरस एवं भावपूर्ण चित्रण मिलता है। ब्रजभाषा के सहज, संगीतमय पदों के माध्यम से उन्होंने कृष्ण भक्ति काव्य को समृद्ध और विशिष्ट आयाम प्रदान किया।
चतुर्भुजदास के पद एवं प्रमुख रचनाएँ
- पालना झूलत सुंदर स्याम / चतुर्भुजदास
- आजु महामंगल निधि माई / चतुर्भुजदास
- धौरी, धूमरी, पियरी, कारी / चतुर्भुजदास
- गोविंद चले चरावन गैया / चतुर्भुजदास
- कहो किनिकीनों दान दही कौ / चतुर्भुजदास
- होरी खेलत ब्रज नंद-लड़ैतौ लाल / चतुर्भुजदास
- राखी बांधति मात जसोदा / चतुर्भुजदास
- स्याम सुनु नियरौ आयो मेहु / चतुर्भुजदास
- रंग नीक री फुही थोरी-थोरी / चतुर्भुजदास
- स्याम सुंदर प्रान-पियारे / चतुर्भुजदास
- नंद-घर होत बधाई आज / चतुर्भुजदास
- जागौ मंगल रूपनिधान / चतुर्भुजदास
- उठो हो गोपाल लाल दुहो धौरी गैया / चतुर्भुजदास
- फूली द्रुम-बेली भांति भांति / चतुर्भुजदास
- पिय-सन मुख गवनति गज गामिनि / चतुर्भुजदास
- मटुकी मेरी मोहनु दीजै / चतुर्भुजदास
- तुम सों क्यों कहौं ब्रजनाथ / चतुर्भुजदास
- गोवर्द्धन पूज्यो गोकुलराइ / चतुर्भुजदास
- मान मनावत मानत नांई / चतुर्भुजदास
- सोभित सुभग लपटी पाग / चतुर्भुजदास
- सिखवत-सिखवत बीती अब रतिया / चतुर्भुजदास
- आजु छठी छबीले लाल की / चतुर्भुजदास
- ब्रज पर नीकी आजुघटा / चतुर्भुजदास
- जयति जयति श्रीगोवर्धन-उद्धरन-धीरे / चतुर्भुजदास
- मेरी आली बंसी बस हौं भई / चतुर्भुजदास
- झूलौ पालने गोविंद / चतुर्भुजदास
- साजें नटवर-भेख गोपाल / चतुर्भुजदास
- विठ्ठलनाथ अनाथ के तारन / चतुर्भुजदास
- श्री विट्ठलनाथ गोकुल-भूप / चतुर्भुजदास
- बैठे हरि नवनि कुंज में जाइ / चतुर्भुजदास
- दीप-दान दै स्याम मनोहर / चतुर्भुजदास
- तबतें और न कछु सुहाई / चतुर्भुजदास
- गोरस बेचत आपु बिकानी / चतुर्भुजदास
- बार बार जमुने! गुन-गान कीजै / चतुर्भुजदास
- भोर तमचुर बोले दीनों जु दरसना / चतुर्भुजदास
- हरि चरननि भजि और न ध्यावै / चतुर्भुजदास
- ठाडी एक बात सुनि धीरी / चतुर्भुजदास
- कर्कश बचन हृदौ छ्वै न कहिजै / चतुर्भुजदास
- खेलन कौं धौरी अकुलानी / चतुर्भुजदास
- भलें आए भोर गिरिवरधरन / चतुर्भुजदास
- चुटिया तेरी बड़ी किधौं मेरी / चतुर्भुजदास
- ब्रज जन अति आधीन दुखारे / चतुर्भुजदास
- इंडुरिया तू डारि दै हौ / चतुर्भुजदास
- पौढिये परे गिरिधरन राइ / चतुर्भुजदास
- ठगोरी मेलि गए सैन की / चतुर्भुजदास
- लटकति फिरति दोहनी लैरी / चतुर्भुजदास
- भूल्यो री दधि कौ मथन करिवौ / चतुर्भुजदास
- सावधान हरि सदन सिधारै / चतुर्भुजदास
- जीवन परिचय / चतुर्भुजदास