परिचय
कविवर बनारसीदास (1586–1643) मध्यकालीन हिंदी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान, दार्शनिक और प्रथम आत्मकथाकार माने जाते हैं। उनकी आत्मकथा 'अर्धकथानक' को हिंदी साहित्य की पहली प्रामाणिक आत्मकथा होने का गौरव प्राप्त है। वे समयसार नाटक, बनारसी विलास और अध्यात्म पदावली जैसी कालजयी कृतियों के रचयिता हैं, जिनमें जैन दर्शन और वैराग्य का अद्भुत समन्वय मिलता है। उनके छप्पय, सवैया और अध्यात्म पदों में जीवन की नश्वरता, आत्म-साक्षात्कार और नीति-उपदेश अत्यंत मार्मिक एवं सहज ब्रजभाषा में अभिव्यक्त हुए हैं।
बनारसी दास की प्रमुख रचनाएँ : छप्पय, सवैया और पद
- बनारसी दास के छप्पय (Chhappay Collection)
- बनारसी दास के सवैया (Sawaiya Collection)
- धीरज तात क्षमा जननी / बनारसी दास
- बनारसी दास के पद (Popular Pads)
- दुबिधा कब जैहैं या मन की / बनारसी दास
- जीव के बधैया वामविद्या के सधैया / बनारसी दास
- मानुष जनम लह्यो सम्यक दरश गह्यो / बनारसी दास
- लोभवंत मानुष जो औगुण अनंत / बनारसी दास
Banarasi Das Collection in Roman Hindi (Hinglish)
- Ghan yan mishthan / Banarasi Das
- Dheeraj taat kshama jananee / Banarasi Das
- Dubidha kab jaihain ya man kee / Banarasi Das
- Poorab ki pashchim ho uttar ki dakshin ho / Banarasi Das
- Lobhavant maanush jo augun anant / Banarasi Das