परिचय
बाबा रामदेवजी (लगभग 1352–1385) राजस्थान के परम पूज्य लोकदेवता, सिद्ध संत और सामाजिक समरसता के अग्रदूत माने जाते हैं। उन्होंने जाति-पांति और छुआछूत के भेदभाव को मिटाकर समाज को समानता और प्रेम का संदेश दिया, जिसके कारण उन्हें हिंदू और मुस्लिम दोनों श्रद्धा से 'रामसा पीर' के रूप में पूजते हैं। इनके रचित भजनों और वाणियों में गुरु महिमा, आत्मज्ञान और निर्गुण भक्ति की सहज अभिव्यक्ति मिलती है। राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित रामदेवरा (रूणीचा) इनका प्रमुख पवित्र तीर्थस्थल है, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों भक्त शीश नवाते हैं।
बाबा रामदेव जी के पद : Baba Ramdev Ji Pad Sangrah
निजानन्द प्रमांण
निज आनंद म्हें ओळख्यौ है जी, ऊग्यौ सहजै सूर॥
वचन बुद्धि सूं ओ पार है जी, इसड़ो अद्भुत नूर।
कलम क्रिया पहुंचे नई जी, लिखूं तो होय कूड़॥
जप तप उणनै लागे नई जी, मुगति रहत मंजूर।
करम क्रिया सारा थाक गया जी, हुय गया चकनाचूर॥
बाहर खोजतां घर में मिल गया जी, बाज्या म्हारे अनहद नूर।
साच कहूं म्हे सांसा मिटग्या है जी, ऊगी म्हारै ग्यान अंकूर॥
वारी हो वारी बालीनाथजी, म्हे तो परस्या जरूर।
रामदेव परचो पायौ है जी, सब में समाया पूरमपूर॥
बाबा रामदेव जी के अन्य प्रमुख पद व वाणियाँ
- गुरु प्रमांण / बाबा रामदेव जी
- अभय प्रमांण / बाबा रामदेव जी
- आगम प्रमांण / बाबा रामदेव जी
- मुगति प्रमांण / बाबा रामदेव जी