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ज़फ़र इक़बाल की ग़ज़लें: Zafar Iqbal Ghazal in Hindi

2024-12-04 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

ज़फ़र इक़बाल (Zafar Iqbal) (जन्म 27 सितंबर 1932) आधुनिक उर्दू शायरी के अत्यंत महत्वपूर्ण और विशिष्ट शायर हैं। उनका जन्म बहावलनगर में हुआ और शुरुआती शिक्षा ओकारा में पूरी करने के बाद उन्होंने लाहौर से उच्च शिक्षा प्राप्त की। पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता रहे ज़फ़र इक़बाल ने दशकों तक प्रतिष्ठित उर्दू अख़बारों में नियमित स्तंभकार के रूप में भी साहित्य व समाज पर बेबाक टिप्पणियाँ लिखीं।

उर्दू ग़ज़ल को पारंपरिक सीमाओं से मुक्त कर आधुनिक संवेदना, रोज़मर्रा की बोलचाल और नए भाषाई मुहावरों से समृद्ध करने का श्रेय उन्हें जाता है। उनकी कालजयी काव्य-कृतियों में ‘आब-ए-रवाँ’, ‘अहद-ए-ज़ियाँ’, ‘बादा-ए-ख़य्याम’, ‘गुलआफ़्ताब’ और ‘अब तक’ प्रमुख हैं। साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें 1999 में प्राइड ऑफ़ परफ़ॉर्मेंस और 2014 में पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान हिलाल-ए-इम्तियाज़ से सम्मानित किया गया।

ज़फ़र इक़बाल की मशहूर ग़ज़लें (Zafar Iqbal Best Ghazals List)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ ज़फ़र इक़बाल की ग़ज़लें हैं — ‘ख़ामुशी अच्छी नहीं इंकार होना चाहिए’, ‘थकना भी लाज़मी था कुछ काम करते करते’, ‘बस एक बार किसी ने गले लगाया था’, ‘ज़फ़र इक़बाल की प्रतिनिधि ग़ज़लें’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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