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यारी साहब के सबद : Yari Sahib Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

यार मुहम्मद, जिन्हें साहित्य में यारी साहब के नाम से जाना जाता है, रीतिकाल के निर्गुण संत-कवियों में गिने जाते हैं। उनका संबंध बावरी संप्रदाय से था और उपलब्ध स्रोतों के अनुसार वे दिल्ली में रहे। उनके गुरु के रूप में वीरू साहब का नाम मिलता है, जबकि बूला साहब उनके प्रमुख शिष्यों में थे।

यारी साहब की कविता में निर्गुण साधना के साथ सूफी प्रभाव और योग संबंधी संकेतों का सुंदर मेल दिखाई देता है। वे ईश्वर को किसी बाहरी स्थान के बजाय मनुष्य के भीतर खोजने की बात करते हैं। दोहे, सबद और कवित्त उनके उपलब्ध काव्य-रूप हैं। उनकी भाषा में अरबी-फारसी शब्दों के साथ लोकप्रचलित हिंदी का प्रयोग मिलता है। ‘बिरहिनी मंदिर दियना बार’ जैसे पदों में आत्मा और परमात्मा के मिलन को विरह तथा प्रेम के रूपक में व्यक्त किया गया है। ‘यारी साहब की रत्नावली’ उनके काव्य का प्रमुख संग्रह है।

यारी साहब के सबद

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