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वली दक्कनी की ग़ज़लें: Wali Dakhani Ghazal in Hindi

2024-12-18 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

वली दकनी (Wali Dakhni) (1667–1707) उर्दू ग़ज़ल के 'बाबा-ए-आदम' (जनक) और क्लासिकल शायरी के ऐतिहासिक स्तंभ माने जाते हैं। उनका मूल नाम वली मुहम्मद वली था और उन्हें वली औरंगाबादी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने दकनी और फ़ारसी की समृद्ध साहित्यिक परंपराओं को उत्तर भारत की खड़ी बोली और रेख़्ता से जोड़कर उर्दू शायरी को नई दिशा दी। 1700 ईस्वी में दिल्ली में उनके दीवान के आगमन ने उत्तर भारत में उर्दू ग़ज़ल को एक नई पहचान और आंदोलन का रूप दिया।

वली दकनी की लोकप्रिय ग़ज़लें (Popular Ghazals of Wali Dakhni)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ वली दक्कनी की ग़ज़लें हैं — ‘याद करना हर घडी़ उस यार का : वली दकनी’, ‘दिल को लगती है : वली दकनी’, ‘फ़िराक़-ए-गुजरात : वली दकनी’, ‘आहिस्ता आहिस्ता : वली दकनी’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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