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तुलसी साहब के सबद (पुणे) : Tulsi Sahab Ke Sabad

2026-09-21 · Shabad / Sabad / सबद

तुलसी साहब (1763–1843) हिंदी संत साहित्य की रहस्यवादी धारा के प्रमुख संत-कवि थे। उनका जन्म पुणे में हुआ था और जीवन का एक बड़ा हिस्सा आध्यात्मिक साधना तथा आत्मज्ञान की खोज में बीता। वे ‘साहिब पंथ’ से संबंधित माने जाते हैं। बाद में वे उत्तर भारत के हाथरस में रहे, जहाँ उनकी साधना और वाणी से प्रभावित अनेक लोग उनके संपर्क में आए।

तुलसी साहब की वाणी में बाहरी कर्मकांड की अपेक्षा आंतरिक साधना, गुरु-महिमा, नाम-स्मरण और आत्मज्ञान पर विशेष जोर मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘घट रामायण’, ‘रत्नसागर’, ‘शब्दावली’ और ‘पद्मसागर’ का उल्लेख मिलता है। उनके पदों और सबदों में रहस्यवादी अनुभूति, विरह और आत्मिक खोज के भाव सहज भाषा में व्यक्त हुए हैं।

तुलसी साहब के सबद और संत वाणी

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