लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

बुल्लेशाह के शबद और कलाम | Bulleh Shah Shabad Sangrah Hindi

2024-11-26 · कलम-काफ़िया-शबद / Shabad / Sabad / सबद

बुल्ले शाह के शबद और सूफी वाणी

  1. इक नुकते विच गल्ल मुकदी ए। बुल्ले शाह शबद
  2. बंसी अचरज कान्ह बजाई । बुल्ले शाह शबद
  3. इश्क दी नवियों नवीं बहार बुल्ले शाह
  4. मुँह आई बात न रैहंदी ए । बुल्ले शाह
  5. मैं क्यों कर जावां काअबे नूं, दिल लोचे तख़त हज़ारे नूं । बुल्ले शाह
  6. इश्क असां नाल केही कीती, लोक मरेंदे ताअने । बुल्ले शाह
  7. उठ जाग घुराड़े मार नहीं, एह सौण तेरे दरकार नहीं ।

इन रचनाओं को भी पढ़िए

कलम-काफ़ियाKalam KafiyaशबदShabadबुल्लेशाह के शबद और कलामBulleh Shah Shabad Sangrah Hindiबुल्लेशाहBullehShah
← सभी रचनाएँ