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संत सालिगराम के सबद : Sant Saligram Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

सालिग्राम (1829–1898) राधास्वामी सत्संग के दूसरे गुरु और संत-कवि थे। उनका संबंध आगरा से था। आध्यात्मिक साधना और सत्संग के अनुभवों को उन्होंने पद, सबद और दोहों के माध्यम से व्यक्त किया। उनकी कविता में गुरु के प्रति समर्पण, प्रेम, विरह, नाम-स्मरण तथा भीतर की साधना का विशेष महत्व दिखाई देता है।

सालिग्राम की रचनाओं में ‘सुरत’ और ‘शब्द’ की साधना बार-बार सामने आती है। वे मनुष्य को बाहरी भटकाव से हटाकर गुरु की शरण, सत्संग और आत्मिक अनुभव की ओर ले जाने की बात कहते हैं। ‘पिया मेरे और मैं पिया की’ जैसे दोहों में ईश्वर के साथ आत्मीय संबंध का भाव मिलता है, जबकि अनेक सबदों में अनहद नाद, गुरु-प्रेम और आध्यात्मिक यात्रा का वर्णन है। उनकी भाषा अपेक्षाकृत सीधी और बोलचाल के निकट है, जिससे कठिन साधना-विषय भी सहज रूप में सामने आते हैं।

सालिग्राम के सबद

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