संत लालदास जी (1540–1648) लाल पंथ के प्रवर्तक थे। उनका जन्म अलवर राज्य के धौलीदूव (डोली धूप) गाँव में एक गरीब मुस्लिम परिवार में हुआ था। उन्होंने वैष्णव जीवन शैली अपनाई और ईमानदारी से मेहनत करके जीवन यापन करने का उपदेश दिया। उनके सबद और दोहे राम-भक्ति और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश सरल लोकभाषा में देते हैं। नीचे सूची से अपनी पसंद की रचना चुनकर पूरा पाठ पढ़ें:
संत लालदास के शब्द और दोहे - पूरी सूची
- संत लालदास के दोहे - दोहों का मुख्य संग्रह
- संत लालदास के सबद - सबदों का मुख्य संग्रह
- हर गुनगावो हरजस रे साधो - प्रसिद्ध सबद
- भरम भुला रे बंदा - भ्रम पर प्रसिद्ध सबद
- राम हम बंदे औगुण भरे - विनय पर सबद
- आछी राम सुमर लेरै मन मेरा - राम सुमिरन पर सबद
- आछी पीत लगई हो लाल - प्रेम भक्ति पर सबद