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Sant Kavi Vrind Ke Dohe – वृंद के दोहे हिंदी अर्थ सहित

2024-11-23 · दोहा / Dohe

रीतिकाल के सबसे व्यावहारिक कवि वृंद (वृंदावनदास, 1643-1723) को पढ़ें तो लगता है जैसे कोई अनुभवी बुजुर्ग जीवन के गुर सिखा रहा हो। वे मेड़ता, जोधपुर के रहने वाले थे और कृष्णगढ़ नरेश के गुरु बने। उनकी वृंद सतसई के दोहे आज भी नीति, व्यवहार और सच्ची समझदारी सिखाते हैं। नीचे उनके प्रसिद्ध दोहों की सूची दी गई है, क्लिक करके अर्थ सहित पूरा पाठ पढ़ें:

वृंद के दोहे - दोहावली पूरी सूची

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