कविराजा बांकीदास आशिया (1771–1833) मारवाड़ के प्रसिद्ध चारण कवि थे। यहां पढ़ें बांकीदास आशिया के गीत, काव्य खंड और दोहे की पूरी सूची। नीचे दिए गए लिंक से अपनी पसंद की रचना का पूरा पाठ और अर्थ देखें।
बांकीदास आशिया रा गीत
- बांकीदास आशिया रा गीत - मुख्य गीत संग्रह
- आयो इंगरेज मुलक रै ऊपर - अंग्रेजों पर प्रसिद्ध व्यंग्य गीत
- करणी माताजी जी रौ गीत - करणी माता पर भक्ति गीत
बांकीदास आशिया के काव्य खंड
- धवळ-पच्चीसी - वीरता पर 25 छंदों का संग्रह
- कायर-कुजस - कायरता पर व्यंग्य रचना
- कृपण-पच्चीसी - कंजूसी पर 25 दोहे
- कुकवि-बत्तीसी - बुरे कवियों पर व्यंग्य
- मावड़िया मिजाज - तत्कालीन समाज पर टिप्पणी
- मोह-मर्दन - वैराग्य और नीति पर रचना
बांकीदास आशिया के दोहे
- अत सीतळ उतराद सूं - प्रसिद्ध दोहा अर्थ सहित
- बांको खिण नह वीसरै - वीरता पर दोहा
- भीतर धर दढ़भाव - नीति पर दोहा
- भुरजाल भूषण - राजपूती शान पर दोहा
- चाव घणौ कर चेत - चेतावनी पर दोहा
- छटा अलौकिक छाय - प्रकृति वर्णन
- देखै भव दरियाव - दर्शन पर दोहा
- धवळा तो जळधार - प्रसिद्ध दोहा
- दूध वरणना पाणियां - नीति दोहा
- गंगा जिण थानक गई - गंगा महिमा पर दोहा
- हंस, मीन, कूरम हूवौ - अवतारों पर दोहा
- जग मांझळ थारो जितै - संसार पर दोहा
- ज्यां हंदा क्रत जोय - कर्म पर दोहा
- ज्यां थारै तट जाय - तीर्थ महिमा
- मंदायण तो माग - प्रसिद्ध दोहा
- नदी साह हंसा संग नित - संगति पर दोहा
- नार मिलै तो नीर में - नीति दोहा
- नारायण पग नीर - भक्ति दोहा
- नीति-मंजरी - नीति संग्रह
- पाप जिता तूं पलक में - पाप-पुण्य पर दोहा
- पतित नहाय छो पीत पत - प्रसिद्ध दोहा
- प्राणी तुझवौ पुखत - मानव जीवन पर
- श्रीपत चरण सरोज रौ - भक्ति दोहा
- वहता रहै विमांण - प्रसिद्ध दोहा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: बांकीदास आशिया कौन थे?
उत्तर: वे 1771-1833 में मारवाड़ के प्रसिद्ध चारण कवि थे, जो डिंगल काव्य और ओजपूर्ण व्यंग्य के लिए जाने जाते हैं।
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