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संत कमाल के सबद : Sant Kamaal Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

संत कमाल का नाम कबीर की परंपरा से जुड़ा हुआ है और उन्हें कबीर का पुत्र तथा शिष्य माना जाता है। उनके जीवन के बारे में निश्चित ऐतिहासिक विवरण बहुत कम मिलते हैं। उपलब्ध उक्तियों से उनका चिंतन बाहरी आडंबर की अपेक्षा मन की निर्मलता और आत्मिक अनुभव पर केंद्रित दिखाई देता है।

कमाल की वाणी में मनुष्य को प्रपंच से दूर रहने, राजा और रंक को समान दृष्टि से देखने तथा अपने भीतर विद्यमान ज्योति को पहचानने की प्रेरणा मिलती है। उनकी भाषा में खड़ीबोली का सहज रूप दिखाई देता है। संत साहित्य में कमाल की रचनाएँ संख्या में सीमित हैं, लेकिन उनमें कबीर की निर्गुण साधना से जुड़ी चिंतनधारा की अपनी स्वतंत्र अभिव्यक्ति दिखाई देती है।

संत कमाल के सबद

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