लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

मध्व मुनीश्वर के सबद : Madhav Munishwar Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

मध्व मुनीश्वर मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में रचना करने वाले भक्त कवि थे। उनका संबंध नासिक-त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र से बताया जाता है और वे मध्व संप्रदाय की वैष्णव पृष्ठभूमि से आए थे। बाद के समय में उनकी साधना और काव्य-दृष्टि का विस्तार संप्रदाय की सीमाओं से आगे दिखाई देता है। उनके पदों में कृष्ण-राम भक्ति के साथ सूफी विचारों और प्रेम की भाषा का भी सुंदर मेल मिलता है। इसी कारण उनकी कविता में ‘इश्क’, ‘साईं’, ‘हरि’, ‘राम’ और ‘खुदा’ जैसे शब्द एक ही आध्यात्मिक अनुभव के अलग संकेतों की तरह सामने आते हैं।

मध्व मुनीश्वर के पदों का बड़ा हिस्सा लोकधर्मी भाषा में है। वे कभी नाम-स्मरण और भक्ति की ओर प्रेरित करते हैं, तो कभी माया, लोभ, जात-पाँत और सांसारिक मोह पर चोट करते हैं। उनके शिष्य अमृतराय भी उल्लेखनीय भक्त कवि हुए।

मध्व मुनीश्वर के सबद और भक्ति पद

इन रचनाओं को भी पढ़िए

शबदShabadमध्व मुनीश्वर के सबदMadhav Munishwar Ke Sabadमध्व मुनीश्वरMadhavMunishwarSabad
← सभी रचनाएँ