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परवीन शाकिर की ग़ज़लें: Parveen Shakir Ghazal in Hindi

2024-12-04 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

परवीन शाकिर (Parveen Shakir) (1952–1994) आधुनिक उर्दू अदब की अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली शायरा थीं। कराची में जन्मी परवीन शाकिर ने अंग्रेज़ी साहित्य और भाषाविज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की और अध्यापन के बाद 1982 में पाकिस्तान की सिविल सेवा (CSS) में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएँ दीं।

1976 में प्रकाशित उनके पहले काव्य-संग्रह ‘ख़ुशबू’ ने उर्दू शायरी की दुनिया में तहलका मचा दिया। इसके उपरांत ‘सद-बर्ग’, ‘ख़ुदकलामी’ और ‘इंकार’ जैसे कालजयी संग्रह आए, जिन्हें उनकी संपूर्ण ग्रंथावली ‘माह-ए-तमाम’ में संकलित किया गया। परवीन शाकिर ने उर्दू ग़ज़ल और नज़्म में स्त्री की अनुभूतियों, आत्मसम्मान, प्रेम, विरह और सामाजिक दबावों को एक विशिष्ट व नाज़ुक अंदाज़ दिया। 1990 में उन्हें Pride of Performance से अलंकृत किया गया। 26 दिसंबर 1994 को एक सड़क हादसे में उनका असामयिक निधन हुआ।

परवीन शाकिर की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Parveen Shakir Ghazals in Hindi & Roman Urdu)

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यहाँ परवीन शाकिर की ग़ज़लें हैं — ‘कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी’, ‘कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की’, ‘वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा’, ‘परवीन शाकिर की लोकप्रिय ग़ज़लें व अश'आर संग्रह’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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