नासिर काज़मी (1925–1972) का पूरा नाम सैयद नासिर रज़ा काज़मी था। उनका जन्म अंबाला में हुआ और विभाजन के बाद वे लाहौर चले गए। वे उर्दू के उन शायरों में शामिल हैं जिन्होंने आधुनिक दौर में ग़ज़ल को नया स्वर दिया। उनकी शायरी में छोटे बहर के अशआर, प्रकृति, स्मृतियों, प्रेम और तन्हाई के अनुभव सहज भाषा में दिखाई देते हैं।
नासिर काज़मी ने ‘बर्ग-ए-नय’, ‘दीवान’, ‘पहली बारिश’ और ‘निशात-ए-ख़्वाब’ जैसी कृतियाँ छोड़ीं। वे रेडियो पाकिस्तान, लाहौर से भी लंबे समय तक जुड़े रहे और उर्दू साहित्य पर गद्य तथा रेडियो लेखन भी किया। 2 मार्च 1972 को लाहौर में उनका निधन हुआ।
नासिर काज़मी की लोकप्रिय ग़ज़लें (Selected Ghazals of Nasir Kazmi)
- दिल धड़कने का सबब याद आया
- Dil dhaDakne ka sabab yaad aaya
- निय्यत-ए-शौक़ भर न जाए कहीं
- Niyyat-e-shauq bhar na jae kahin
- दिल में इक लहर सी उठी है अभी
- Dil mein ek lahr si uThi hai abhi
- नए कपड़े बदल कर जाऊँ कहाँ और बाल बनाऊँ किस के लिए
- Nae kapDe badal kar jaun kahan aur baal banaun kis ke liye
- अपनी धुन में रहता हूँ
- Apni dhun mein rahta hun
- तिरे आने का धोका सा रहा है
- Tere aane ka dhoka sa raha hai
- दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया
- Dayar-e-dil ki raat mein charagh sa jala gaya
- ग़म है या ख़ुशी है तू
- Gham hai ya KHushi hai tu
- वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए
- Wo sahilon pe gane wale kya hue
- गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो
- Gae dinon ka suragh le kar kidhar se aaya kidhar gaya wo
- होती है तेरे नाम से वहशत कभी कभी
- Hoti hai tere nam se wahshat kabhi kabhi
- दिल में और तो क्या रक्खा है
- वो दिल-नवाज़ है लेकिन नज़र-शनास नहीं
- Wo dil-nawaz hai lekin nazar-shanas nahin
- क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे
- Kya zamana tha ki hum rose mila karte the
- कुछ यादगार-ए-शहर-ए-सितमगर ही ले चलें
- Kuchh yaadgar-e-shahr-e-sitamgar hi le chalen
- फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए
- Phir sawan rut ki pawan chali tum yaad aae
- आज तो बे-सबब उदास है जी
- Aaj to be-sabab udas hai ji
- मैं ने जब लिखना सीखा था
- Maine jab likhna sikha tha
- मुसलसल बेकली दिल को रही है
- Musalsal bekali dil ko rahi hai
- गली गली मिरी याद बिछी है प्यारे रस्ता देख के चल
- Gali gali meri yaad bichhi hai pyare rasta dekh ke chal
- मैं हूँ रात का एक बजा है
- Main hun raat ka ek baja hai
- इस से पहले कि बिछड़ जाएँ हम
- Is se pahle ki bichhaD jaen hum
- गिरफ़्ता-दिल हैं बहुत आज तेरे दीवाने
- Girafta-dil hain bahut aaj tere diwane
- शहर सुनसान है किधर जाएँ
- Shahr sunsan hai kidhar jaen
- नासिर क्या कहता फिरता है कुछ न सुनो तो बेहतर है
- Nasir kya kahta phirta hai kuchh na suno to behtar hai
- देख मोहब्बत का दस्तूर
- Dekh mohabbat ka dastur
- दुख की लहर ने छेड़ा होगा
- Dukh ki lahar ne chheDa hoga
- थोड़ी देर को जी बहला था
- ThoDi der ko ji bahla tha
- कौन उस राह से गुज़रता है
- Kaun us rah se guzarta hai
- सफ़र-ए-मंज़िल-ए-शब याद नहीं
- Safar-e-manzil-e-shab yaad nahin
- तेरी ज़ुल्फ़ों के बिखरने का सबब है कोई
- Teri zulfon ke bikharne ka sabab hai koi
- आराइश-ए-ख़याल भी हो दिल-कुशा भी हो
- Aaraish-e-KHayal bhi ho dil-kusha bhi ho
- आज तुझे क्यूँ चुप सी लगी है
- Aaj tujhe kyun chup si lagi hai
- Jab raat gae teri yaad aai sau tarah se ji ko bahlaya
- किसी कली ने भी देखा न आँख भर के मुझे
- Kisi kali ne bhi dekha na aankh bhar ke mujhe
- ओ मेरे मसरूफ़ ख़ुदा
- O mere masruf KHuda
- गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग
- Gali gali aabaad thi jin se kahan gae wo log
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ नासिर काज़मी की ग़ज़लें हैं — ‘दिल धड़कने का सबब याद आया’, ‘Dil dhaDakne ka sabab yaad aaya’, ‘निय्यत-ए-शौक़ भर न जाए कहीं’, ‘Niyyat-e-shauq bhar na jae kahin’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।