परिचय
संत मीतादास (1690–1768) उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से जुड़े निर्गुण संत-परंपरा के अत्यंत विचारशील एवं प्रखर भक्त-कवि थे। कबीर साहब की वैचारिक चेतना से प्रभावित होकर उन्होंने समाज में व्याप्त जाति-पाँति, बाह्य आडंबरों और रूढ़ियों पर निर्भीक चोट की। उनके काव्य में केवल पुस्तकीय ज्ञान के स्थान पर आचरण की शुद्धता, अंतर्मुखी साधना, गुरु-महिमा और आत्मज्ञान को प्रमुखता दी गई है। सरल सधुक्कड़ी भाषा में रचित उनके दोहों और सबदों में उलटबाँसियों तथा गहरे दार्शनिक भावों का अनूठा समन्वय मिलता है।
संत मीतादास के प्रमुख सबद एवं पद
- बहुत कठिन है भक्ति / संत मीतादास
- रे भाई हरि विसराए बूड़ा / संत मीतादास
- अगम पंथ का जो कोह / संत मीतादास
- राम गति समुझ परै हौं कैसे / संत मीतादास