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मजाज़ लखनवी की ग़ज़लें: Majaz Lakhnavi Ghazal in Hindi

2024-12-10 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

मजाज़ लखनवी उर्दू के प्रसिद्ध शायर थे। उनका असली नाम असरार-उल-हक़ मजाज़ था और वे रोमानी शायरी के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम, युवाओं की भावनाएँ, सपने और समाज के बदलते स्वरूप की झलक मिलती है। उनकी भाषा में रवानगी और भावनात्मक गहराई दिखाई देती है। उर्दू शायरी में मजाज़ लखनवी का नाम आज भी विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। इस पृष्ठ पर उनकी चुनिंदा ग़ज़लें, नज़्में और शायरी पढ़ी जा सकती हैं।

मजाज़ लखनवी की लोकप्रिय शायरी व ग़ज़लें (Selected Poetry of Majaz Lakhnavi)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ मजाज़ लखनवी की ग़ज़लें हैं — ‘हुस्न को बे-हिजाब होना था’, ‘Husn ko be-hijab hona tha’, ‘तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए’, ‘Taskin-e-dil-e-mahzun na hui wo sai-e-karam farma bhi gae’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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