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कुंवर बेचैन की ग़ज़लें: Kunwar Bechain Ghazal in Hindi

2026-10-03 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

कुँवर बेचैन (1942–2021)

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कुँवर बेचैन (1942–2021)

कुँवर बेचैन (असली नाम कुँवर बहादुर सक्सेना) हिंदी ग़ज़ल के उन गिने-चुने शायरों में थे जिन्होंने ग़ज़ल को आम आदमी की ज़ुबान दी।

ग़ाज़ियाबाद में हिंदी के प्रोफ़ेसर रहे डॉ. बेचैन ने 'ग़ज़ल का व्याकरण' जैसी पुस्तक लिखी और कवि-सम्मेलनों के मंच पर भी खूब सराहे गए।

उनकी ग़ज़लें रोज़मर्रा के दुख-सुख, संघर्ष और उम्मीद को सरल-सीधी भाषा में बयाँ करती हैं।

यहाँ पढ़िए कुँवर बेचैन की चुनिंदा ग़ज़लें, जो हिंदी ग़ज़ल की एक ताज़ा और सजग आवाज़ हैं।

कुंवर बेचैन ग़ज़लें

Kunwar Bechain Ghazal in English or Roman 

कुँवर बेचैन (असली नाम कुँवर बहादुर सक्सेना) हिंदी ग़ज़ल के उन गिने-चुने शायरों में थे जिन्होंने ग़ज़ल को आम आदमी की ज़ुबान दी।

ग़ाज़ियाबाद में हिंदी के प्रोफ़ेसर रहे डॉ. बेचैन ने 'ग़ज़ल का व्याकरण' जैसी पुस्तक लिखी और कवि-सम्मेलनों के मंच पर भी खूब सराहे गए।

उनकी ग़ज़लें रोज़मर्रा के दुख-सुख, संघर्ष और उम्मीद को सरल-सीधी भाषा में बयाँ करती हैं।

यहाँ पढ़िए कुँवर बेचैन की चुनिंदा ग़ज़लें, जो हिंदी ग़ज़ल की एक ताज़ा और सजग आवाज़ हैं।

कुंवर बेचैन ग़ज़लें

Kunwar Bechain Ghazal in English or Roman 

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ कुंवर बेचैन की ग़ज़लें हैं — ‘हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए’, ‘कोई रस्ता है न मंज़िल न तो घर है कोई’, ‘उँगलियाँ थाम के ख़ुद चलना सिखाया था जिसे’, ‘चोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रिया’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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