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इंशा अल्ला खाँ की ग़ज़लें: Insha Allah Khan Ghazal in Hindi

2024-12-08 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

इंशा अल्ला ख़ाँ इंशा (लगभग 1752–1817) उर्दू, फ़ारसी और हिंदी के बहुभाषी कवि और लेखक थे। उनका जन्म मुर्शिदाबाद में हुआ और बाद में दिल्ली तथा लखनऊ के साहित्यिक और शाही दरबारों से जुड़े। अपनी भाषाई दक्षता और चुटीले अंदाज़ के कारण वे अपने समय के साहित्यिक संसार में अलग पहचान रखते थे।

इंशा की खास उपलब्धियों में ‘दर्या-ए-लताफ़त’ शामिल है, जिसे उर्दू भाषा के व्याकरण और भाषिक अध्ययन की शुरुआती महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है। उन्होंने ‘रानी केतकी की कहानी’ भी लिखी, जो आरंभिक हिंदी गद्य की उल्लेखनीय रचनाओं में है। ग़ज़ल, क़सीदा, मसनवी, रुबाई, रेख़्ती और व्यंग्य सहित उन्होंने कई विधाओं में लिखा।

इंशा अल्ला ख़ाँ इंशा की चुनिंदा ग़ज़लें (Selected Ghazals of Insha Allah Khan)

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यहाँ इंशा अल्ला खाँ की ग़ज़लें हैं — ‘कमर बाँधे हुए चलने को इंशा अल्ला खाँ इंशा की ग़ज़ल’, ‘अच्छा जो ख़फ़ा हम से हो तुम इंशा अल्ला खाँ इंशा की ग़ज़ल’, ‘मिल मुझ से ऐ परी तुझे इंशा अल्ला खाँ इंशा की ग़ज़ल’, ‘नींद मस्तों को कहाँ इंशा अल्ला खाँ इंशा की ग़ज़ल’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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