हबीब जालिब (Habib Jalib) (1928–1993) उर्दू और पंजाबी अदब के इंक़लाबी शायर और आवामी आवाज़ थे। उनका वास्तविक नाम हबीब अहमद था और उनका जन्म होशियारपुर (पंजाब) में हुआ था। विभाजन के बाद वे पाकिस्तान चले गए और प्रगतिशील लेखक आंदोलन से जुड़कर सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, दमन और आम जनमानस के संघर्षों पर बेबाक लेखनी चलाई। उनकी लोकप्रिय कृतियों में सिर-ए-मक़्तल, ज़िक्र बहते ख़ून का और गुम्बद-ए-बेदार शामिल हैं। यहाँ हबीब जालिब की प्रसिद्ध ग़ज़लों और नज़्मों का संपूर्ण संग्रह देवनागरी एवं रोमन लिपि में प्रस्तुत है।
तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था : ग़ज़ल
तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था
उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था
कोई ठहरा हो जो लोगों के मुक़ाबिल तो बताओ
वो कहाँ हैं कि जिन्हें नाज़ बहुत अपने तईं था
आज सोए हैं तह-ए-ख़ाक न जाने यहाँ कितने
कोई शोला कोई शबनम कोई महताब-जबीं था
अब वो फिरते हैं इसी शहर में तन्हा लिए दिल को
इक ज़माने में मिज़ाज उन का सर-ए-अर्श-ए-बरीं था
छोड़ना घर का हमें याद है 'जालिब' नहीं भूले
था वतन ज़ेहन में अपने कोई ज़िंदाँ तो नहीं था
हबीब जालिब की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Habib Jalib Ghazal & Shayari List)
- तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था
- दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं
- शेर से शाइरी से डरते हैं
- दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है
- और सब भूल गए हर्फ़-ए-सदाक़त लिखना
- भुला भी दे उसे जो बात हो गई प्यारे
- हुजूम देख के रस्ता नहीं बदलते हम
- कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ
- अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं
- इस शहर-ए-ख़राबी में ग़म-ए-इश्क़ के मारे
- फिर दिल से आ रही है सदा उस गली में चल
- वतन को कुछ नहीं ख़तरा निज़ाम-ए-ज़र है ख़तरे में
- दिल पर जो ज़ख़्म हैं वो दिखाएँ किसी को क्या
- ये और बात तेरी गली में न आएँ हम
- झूटी ख़बरें घड़ने वाले झूटे शे'र सुनाने वाले
- दिल-ए-पुर-शौक़ को पहलू में दबाए रक्खा
- वही हालात हैं फ़क़ीरों के
- कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें
- बटे रहोगे तो अपना यूँही बहेगा लहू
- अब तेरी ज़रूरत भी बहुत कम है मिरी जाँ
- ख़ूब आज़ादी-ए-सहाफ़त है
- वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा
- फ़ैज़' और 'फ़ैज़' का ग़म भूलने वाला है कहीं
- बातें तो कुछ ऐसी हैं कि ख़ुद से भी न की जाएँ
- अफ़्सोस तुम्हें कार के शीशे का हुआ है
- उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं
- आग है फैली हुई काली घटाओं की जगह
- जीवन मुझ से मैं जीवन से शरमाता हूँ
- कौन बताए कौन सुझाए कौन से देस सिधार गए
- मीर'-ओ-'ग़ालिब' बने 'यगाना' बने
- ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम
- कहीं आह बन के लब पर तिरा नाम आ न जाए
- बहुत रौशन है शाम-ए-ग़म हमारी
- फिर कभी लौट कर न आएँगे
- उस ने जब हँस के नमस्कार किया
- दिल वालो क्यूँ दिल सी दौलत यूँ बे-कार लुटाते हो
- चूर था ज़ख़्मों से दिल ज़ख़्मी जिगर भी हो गया
- शे'र होता है अब महीनों में
- कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़
- न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में
- जागने वालो ता-ब-सहर ख़ामोश रहो
- यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त-ओ-गरेबाँ यारो
- दरख़्त सूख गए रुक गए नदी नाले
- ये सोच कर न माइल-ए-फ़रियाद हम हुए
- हम ने सुना था सहन-ए-चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं
- tum se pahle wo jo ek shaKHs yahan taKHt-nashin tha
- dil ki baat labon par la kar ab tak hum dukh sahte hain
- sher se shairi se Darte hain
- dushmanon ne jo dushmani ki hai
- aur sab bhul gae harf-e-sadaqat likhna
- bhula bhi de use jo baat ho gai pyare
- hujum dekh ke rasta nahin badalte hum
- kuchh log KHayalon se chale jaen to soen
- apnon ne wo ranj diye hain begane yaad aate hain
- is shahr-e-KHarabi mein gham-e-ishq ke mare
- phir dil se aa rahi hai sada us gali mein chal
- watan ko kuchh nahin KHatra nizam-e-zar hai KHatre mein
- dil par jo zaKHm hain wo dikhaen kisi ko kya
- ye aur बात teri gali mein na aaen hum
- jhuTi KHabren ghaDne wale jhuTe sher sunane wale
- dil-e-pur-shauq ko pahlu mein dabae rakkha
- wahi haalat hain faqiron ke
- kabhi to mehrban ho kar bula len
- baTe rahoge to apna yunhi bahega lahu
- ab teri zarurat bhi bahut kam hai meri jaan
- KHub aazadi-e-sahafat hai
- wo dekhne mujhe aana to chahta hoga
- faiz aur faiz ka gham bhulne wala hai kahin
- baaten to kuchh aisi hain ki KHud se bhi na ki jaen
- afsos tumhein car ke shishe ka hua hai
- us raunat se wo jite hain ki marna hi nahin
- aag hai phaili hui kali ghaTaon ki jagah
- baDe bane the jalib sahab piTe saDak ke bich
- jiwan mujhse main jiwan se sharmata hun
- kaun batae kaun sujhae kaun se des sidhaar gae
- mir-o-ghaalib bane yagana bane
- zarre hi sahi koh se Takra to gae hum
- kahin aah ban ke lab par tera nam aa na jae
- bahut raushan hai sham-e-gham hamari
- phir kabhi lauT kar na aaenge
- usne jab hans ke namaskar kiya
- dil walo kyun dil si daulat yun be-kar luTate ho
- chur tha zaKHmon se dil zaKHmi jigar bhi ho gaya
- sher hota hai ab mahinon mein
- kam purana bahut naya tha firaq
- na Dagmagae kabhi hum wafa ke raste mein
- jagne walo ta-ba-sahar KHamosh raho
- yun wo zulmat se raha dast-o-gareban yaro
- daraKHt sukh gae ruk gae nadi nale
- ye soch kar na mail-e-fariyaad hum hue
- hum aawara ganw ganw basti basti phirne wale
- humne dil se tujhe sada mana
- humne suna tha sahn-e-chaman mein kaif ke baadal chhae hain
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ हबीब जालिब की ग़ज़लें हैं — ‘तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था’, ‘दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं’, ‘शेर से शाइरी से डरते हैं’, ‘दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।