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हबीब जालिब की ग़ज़लें: Habib Jalib Ghazal in Hindi

2024-11-23 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

हबीब जालिब (Habib Jalib) (1928–1993) उर्दू और पंजाबी अदब के इंक़लाबी शायर और आवामी आवाज़ थे। उनका वास्तविक नाम हबीब अहमद था और उनका जन्म होशियारपुर (पंजाब) में हुआ था। विभाजन के बाद वे पाकिस्तान चले गए और प्रगतिशील लेखक आंदोलन से जुड़कर सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, दमन और आम जनमानस के संघर्षों पर बेबाक लेखनी चलाई। उनकी लोकप्रिय कृतियों में सिर-ए-मक़्तल, ज़िक्र बहते ख़ून का और गुम्बद-ए-बेदार शामिल हैं। यहाँ हबीब जालिब की प्रसिद्ध ग़ज़लों और नज़्मों का संपूर्ण संग्रह देवनागरी एवं रोमन लिपि में प्रस्तुत है।

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था : ग़ज़ल

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था
उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था
कोई ठहरा हो जो लोगों के मुक़ाबिल तो बताओ
वो कहाँ हैं कि जिन्हें नाज़ बहुत अपने तईं था
आज सोए हैं तह-ए-ख़ाक न जाने यहाँ कितने
कोई शोला कोई शबनम कोई महताब-जबीं था
अब वो फिरते हैं इसी शहर में तन्हा लिए दिल को
इक ज़माने में मिज़ाज उन का सर-ए-अर्श-ए-बरीं था
छोड़ना घर का हमें याद है 'जालिब' नहीं भूले
था वतन ज़ेहन में अपने कोई ज़िंदाँ तो नहीं था

हबीब जालिब की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Habib Jalib Ghazal & Shayari List)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ हबीब जालिब की ग़ज़लें हैं — ‘तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था’, ‘दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं’, ‘शेर से शाइरी से डरते हैं’, ‘दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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