लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

गुरु अर्जुनदेव के सबद : Guru Arjundev Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के पाँचवें गुरु थे। उनका जन्म 15 अप्रैल 1563 को गोइंदवाल साहिब में गुरु रामदास जी और माता भानी जी के घर हुआ। 1581 में वे गुरु पद पर आसीन हुए। अमृतसर में हरमंदिर साहिब के विकास और तरन तारन जैसे नगरों की स्थापना से भी उनका नाम जुड़ा है। उनके समय में सिख समुदाय का धार्मिक और सामाजिक आधार अधिक संगठित हुआ।

गुरु अर्जुन देव जी का सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक और धार्मिक कार्य आदि ग्रंथ का संकलन था। उन्होंने पहले चार गुरुओं की वाणी, विभिन्न संतों और भक्तों की रचनाओं तथा अपनी वाणी को एकत्र कराया और 1604 में आदि ग्रंथ को हरमंदिर साहिब में प्रतिष्ठित कराया। उनकी अपनी बाणी में नाम-स्मरण, सेवा, विनम्रता, ईश्वर-भक्ति और जीवन की सच्चाई जैसे विषय मिलते हैं। 30 मई 1606 को लाहौर में उन्होंने शहादत प्राप्त की।

गुरु अर्जुन देव जी के सबद

```

इन रचनाओं को भी पढ़िए

शबदShabadगुरु अर्जुनदेव के सबदGuru Arjundev Ke Sabadगुरु अर्जुनदेवGuruArjundevSabad
← सभी रचनाएँ