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वसीम बरेलवी की ग़ज़लें: Waseem Barelvi Ghazal in Hindi

2024-12-07 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

वसीम बरेलवी की ग़ज़लें | Waseem Barelvi Ghazals in Hindi

वसीम बरेलवी (Waseem Barelvi) का असली नाम ज़ाहिद हसन है। 1940 में उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मे वसीम बरेलवी ने आगरा विश्वविद्यालय से उर्दू में एम.ए. किया और बाद में बरेली कॉलेज के उर्दू विभाग से जुड़े, जहाँ वे विभागाध्यक्ष भी रहे। उनकी साहित्यिक यात्रा 1950 के दशक के अंत में शुरू हुई और आगे चलकर मुशायरों के मंच पर वसीम बरेलवी की शायरी (Waseem Barelvi Poetry) ने अपनी एक अलग और गहरी पहचान बनाई।

उनकी पहचान मुख्यतः एक बेहतरीन ग़ज़ल के शायर (Urdu Poet) के रूप में है। उनकी कई दिलकश ग़ज़लों को जगजीत सिंह सहित कई प्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज़ दी है। 'तबस्सुम-ए-ग़म', 'मिज़ाज', 'आँख आँसू हुई', 'मेरा क्या' और 'मौसम अंदर बाहर के' उनके चर्चित काव्य-संग्रहों में शामिल हैं। उर्दू साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया है।

वसीम बरेलवी की बेहतरीन ग़ज़लें | Best Ghazals of Waseem Barelvi

  1. अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आइना हो जाऊँगा (Apne Har Har Lafz Ka Khud Aaina Ho Jaunga)
  2. अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे (Apne Chehre Se Jo Zahir Hai Chhupaen Kaise)
  3. आते आते मिरा नाम सा रह गया (Aate Aate Mera Naam Sa Rah Gaya)
  4. मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है (Moh मोहब्बत Na-Samajh Hoti Hai Samjhana Zaruri Hai)
  5. क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता (Kya Dukh Hai Samundar Ko Bata Bhi Nahin Sakta)
  6. मैं इस उमीद पे डूबा कि तू बचा लेगा (Main Is Umid Pe Duba Ki Tu Bacha Lega)
  7. दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता (Dukh Apna Agar Hum Ko Batana Nahin Aata)
  8. चाँद का ख़्वाब उजालों की नज़र लगता है (Chand Ka Khwab Ujalon Ki Nazar Lagta Hai)
  9. वो मेरे घर नहीं आता मैं उस के घर नहीं जाता (Wo Mere Ghar Nahin Aata Main Uske Ghar Nahin Jata)
  10. ज़रा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है (Zara Sa Qatra Kahin Aaj Agar Ubharta Hai)
  11. भला ग़मों से कहाँ हार जाने वाले थे (Bhala Ghamon Se Kahan Haar Jaane Wale The)
  12. हादसों की ज़द पे हैं तो मुस्कुराना छोड़ दें (Hadson Ki Zad Pe Hain To Muskurana Chhod Den)
  13. लहू न हो तो क़लम तर्जुमाँ नहीं होता (Lahu Na Ho To Qalam Tarjuman Nahin Hota)
  14. मैं आसमाँ पे बहुत देर रह नहीं सकता (Main Aasman Pe Bahut Der Rah Nahin Sakta)
  15. अंधेरा ज़ेहन का सम्त-ए-सफ़र जब खोने लगता है (Andhera Zehn Ka Samt-e-Safar Jab Khone Lagta Hai)
  16. सब ने मिलाए हाथ यहाँ तीरगी के साथ (Sab Ne Milae Hath Yahan Tirgi Ke Sath)
  17. शाम तक सुब्ह की नज़रों से उतर जाते हैं (Sham Tak Subh Ki Nazron Se Utar Jate Hain)
  18. अपने साए को इतना समझाने दे (Apne Sae Ko Itna Samjhane De)
  19. कितना दुश्वार था दुनिया ये हुनर आना भी (Kitna Dushwar Tha Duniya Ye Hunar Aana Bhi)
  20. जहाँ दरिया कहीं अपने किनारे छोड़ देता है (Jahan Dariya Kahin Apne Kinare Chhod Deta Hai)
  21. अपने अंदाज़ का अकेला था (Apne Andaz Ka Akela Tha)
  22. खुल के मिलने का सलीक़ा आप को आता नहीं (Khul Ke Milne Ka Saliqa Aap Ko Aata Nahin)
  23. मेरे ग़म को जो अपना बताते रहे (Mere Gham Ko Jo Apna Batate Rahe)
  24. ये है तो सब के लिए हो ये ज़िद हमारी है (Ye Hai To Sab Ke Liye Ho Ye Zid Hamari Hai)
  25. हमारा अज़्म-ए-सफ़र कब किधर का हो जाए (Hamara Azm-e-Safar Kab Kidhar Ka Ho Jae)
  26. दूर से ही बस दरिया दरिया लगता है (Dur Se Hi Bas Dariya Dariya Lagta Hai)
  27. बीते हुए दिन ख़ुद को जब दोहराते हैं (Bite Hue Din Khud Ko Jab Dohraate Hain)
  28. तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे (Tu Samajhta Hai Ki Rishton Ki Duhai Denge)
  29. मुझे तो क़तरा ही होना बहुत सताता है (Mujhe To Qatra Hi Hona Bahut Satata Hai)
  30. मैं ये नहीं कहता कि मिरा सर न मिलेगा (Main Ye Nahin Kahta Ki Mera Sar Na Milega)
  31. चलो हम ही पहल कर दें कि हम से बद-गुमाँ क्यूँ हो (Chalo Hum Hi Pahal Kar Den Ki Humse Bad-Guman Kyun Ho)
  32. कुछ इतना ख़ौफ़ का मारा हुआ भी प्यार न हो (Kuchh Itna Khauf Ka Mara Hua Bhi Pyar Na Ho)
  33. वो मुझ को क्या बताना चाहता है (Wo Mujhko Kya Batana Chahta Hai)
  34. नहीं कि अपना ज़माना भी तो नहीं आया (Nahin Ki Apna Zamana Bhi To Nahin Aaya)
  35. तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते (Tumhaari Rah Mein Mitti Ke Ghar Nahin Aate)
  36. उसे समझने का कोई तो रास्ता निकले (Use Samajhne Ka Koi To Rasta Nikle)
  37. तहरीर से वर्ना मिरी क्या हो नहीं सकता (Tahrir Se Warna Meri Kya Ho Nahin Sakta)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

वसीम बरेलवी का असली नाम क्या है?

वसीम बरेलवी का असली नाम ज़ाहिद हसन है। उनका जन्म 1940 में उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में हुआ था।

वसीम बरेलवी की कौन-कौन सी किताबें प्रसिद्ध हैं?

'तबस्सुम-ए-ग़म', 'मिज़ाज', 'आँख आँसू हुई', 'मेरा क्या' और 'मौसम अंदर बाहर के' उनकी शायरी के प्रमुख काव्य-संग्रहों में शामिल हैं।

वसीम बरेलवी की ग़ज़लें किसने गाई हैं?

उनकी कई मशहूर ग़ज़लों को ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह सहित कई जाने-माने गायकों ने अपनी आवाज़ दी है।

यह वसीम बरेलवी की चुनिंदा और बेहतरीन ग़ज़लों का संकलन है। सभी ग़ज़लें पाठकों की सुविधा के लिए आसान हिंदी फॉन्ट (देवनागरी) में उपलब्ध कराई गई हैं।

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ वसीम बरेलवी की ग़ज़लें हैं — ‘अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आइना हो जाऊँगा (Apne Har Har Lafz Ka Khud Aaina Ho Jaunga)’, ‘अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे (Apne Chehre Se Jo Zahir Hai Chhupaen Kaise)’, ‘आते आते मिरा नाम सा रह गया (Aate Aate Mera Naam Sa Rah Gaya)’, ‘मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है (Moh मोहब्बत Na-Samajh Hoti Hai Samjhana Zaruri Hai)’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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