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शकील बदायूनी की ग़ज़लें: Shakeel Badayuni Ghazal in Hindi

2024-12-07 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

शकील बदायूनी (Shakeel Badayuni) (1916–1970) उर्दू अदब के प्रख्यात शायर और हिंदी सिनेमा के कालजयी गीतकार थे। बदायूँ (उत्तर प्रदेश) में जन्मे शकील ने आरंभिक तालीम के दौरान ही उर्दू, फ़ारसी, अरबी और हिंदी साहित्य पर मजबूत पकड़ बनाई। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दौर में वे मुशायरों के लोकप्रिय शायर के रूप में उभरे। अपनी नज़ाकत भरी रूमानी ग़ज़लों और नफ़ासत भरे अंदाज़ के लिए वे पूरे मुल्क में पहचाने गए।

वर्ष 1946 में फ़िल्म दर्द से उनके फ़िल्मी सफ़र का आग़ाज़ हुआ। महान संगीतकार नौशाद के साथ उनकी ऐतिहासिक साझेदारी ने भारतीय सिनेमा को बैजू बावरा, मदर इंडिया और मुग़ल-ए-आज़म जैसी अमर फ़िल्मों के अविस्मरणीय गीत दिए। शकील बदायूनी ने लगातार तीन वर्षों (1961 से 1963) तक प्रतिष्ठित फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार जीता। उनकी कालजयी ग़ज़लें आज भी साहित्य और संगीत प्रेमियों के दिलों में बसी हैं।

शकील बदायूनी की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Popular Ghazals of Shakeel Badayuni)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ शकील बदायूनी की ग़ज़लें हैं — ‘ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया’, ‘ai mohabbat tere anjam pe rona aaya’, ‘मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे’, ‘mere ham-nafas mere ham-nawa mujhe dost ban ke dagha na de’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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