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शहरयार की ग़ज़लें: Shahryar Ghazal in Hindi

2024-12-07 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

शहरयार (1936–2012) उर्दू के प्रमुख शायर और साहित्यकार थे। उनका असली नाम अख़लाक़ मोहम्मद ख़ान था और उनका जन्म बरेली ज़िले के आँवला में हुआ। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और बाद में वहीं उर्दू विभाग में अध्यापन किया। आगे चलकर वे उर्दू विभाग के अध्यक्ष भी रहे।

शहरयार की पहचान ग़ज़ल और नज़्म के शायर के रूप में बनी, लेकिन आम दर्शकों तक उनकी शायरी फ़िल्मों के ज़रिए भी पहुँची। ‘उमराव जान’ के लिए लिखे उनके गीत विशेष रूप से चर्चित हुए। उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में ‘इस्म-ए-आज़म’, ‘सातवाँ दर’, ‘हिज्र के मौसम’ और ‘नींद की किरचें’ शामिल हैं। 1987 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और 2008 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले प्रमुख उर्दू साहित्यकारों में गिने जाते हैं।

शहरयार की प्रसिद्ध ग़ज़लें एवं कलाम (Selected Ghazals of Shahryar)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ शहरयार की ग़ज़लें हैं — ‘सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है शहरयार ग़ज़ल ग़ज़लें’, ‘Shahryar Ghazal Shaharyar Ghazalssiine meñ jalan āñkhoñ meñ tūfān sā kyuuñ hai’, ‘जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने शहरयार ग़ज़ल ग़ज़लें’, ‘justuju jis ki thi usko to na paya humne Shahryar Ghazal Shaharyar Ghazals’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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