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शाद अज़ीमाबादी की ग़ज़लें: Shaad Azimabadi Ghazal in Hindi

2024-12-07 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

शाद अज़ीमाबादी (1846–1927) का असली नाम सैयद अली मुहम्मद था। उनका जन्म अज़ीमाबाद, वर्तमान पटना में हुआ था। बचपन से ही उन्हें शायरी में रुचि थी और उन्होंने अरबी, फ़ारसी तथा उर्दू की शिक्षा प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने अपने समय के कई उस्ताद शायरों से शायरी की बारीकियाँ सीखीं।

शाद अज़ीमाबादी मुख्यतः ग़ज़ल के शायर थे, हालांकि उन्होंने मर्सिया भी लिखा। उनकी शायरी में नए विचार और अभिव्यक्ति के अलग ढंग के साथ नैतिकता, दर्शन और रहस्यवाद जैसे विषय भी दिखाई देते हैं। उनका काव्य पाँच खंडों में प्रकाशित हुआ। उनके प्रमुख साहित्यिक कार्यों में कुल्लियात-ए-शाद, मयख़ाना-ए-इल्हाम, फ़िक्र-ए-बलीग़ और नवाए-वतन शामिल हैं। पटना के सामाजिक और प्रशासनिक जीवन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही और उन्हें ‘ख़ान बहादुर’ की उपाधि मिली थी।

शाद अज़ीमाबादी की लोकप्रिय ग़ज़लें (Selected Ghazals of Shad Azimabadi)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ शाद अज़ीमाबादी की ग़ज़लें हैं — ‘ढूँडोगे अगर मुल्कों मुल्कों मिलने के नहीं नायाब हैं हम’, ‘DhunDoge agar mulkon mulkon milne ke nahin nayab hain hum’, ‘तमन्नाओं में उलझाया गया हूँ’, ‘Tamannaon mein uljhaya gaya hun’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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