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हसरत मोहानी की ग़ज़लें: Hasrat Mohani Ghazal in Hindi

2024-12-07 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

मौलाना हसरत मोहानी (Hasrat Mohani) (1875–1951) स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी पत्रकार और उर्दू ग़ज़ल के शीर्ष शायर थे। उनका वास्तविक नाम सैयद फ़ज़ल-उल-हसन था और उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मोहान में हुआ। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से तालीम हासिल करने के साथ ही उन्होंने आज़ादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और पहली बार 'इंक़लाब ज़िंदाबाद' का नारा दिया। उन्होंने 1903 में प्रसिद्ध पत्रिका ‘उर्दू-ए-मुअल्ला’ का प्रकाशन शुरू किया, जिसके लिए उन्हें ब्रिटिश हुकूमत के दौरान क़ैद-ओ-बंद की सज़ाएँ भी काटनी पड़ीं।

उर्दू अदब में हसरत मोहानी को आधुनिक काल में पारंपरिक ग़ज़ल को नया जीवन देने वाले उस्ताद शायर के रूप में याद किया जाता है। उनकी कालजयी ग़ज़ल ‘चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है’ ग़ुलाम अली और जगजीत सिंह की आवाज़ में अमर हो चुकी है। वे भारतीय संविधान सभा (Constituent Assembly) के सम्मानित सदस्य भी रहे। उनकी रचनाओं में हुस्न-ओ-इश्क़ की पाकीज़गी, रूमानी नफ़ासत और सामाजिक-राजनीतिक चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

हसरत मोहानी की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Hasrat Mohani Best Ghazals)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ हसरत मोहानी की ग़ज़लें हैं — ‘जो वो नज़र बसर-ए-लुत्फ़ आम हो जाए’, ‘jo wo nazar basar-e-lutf aam ho jae’, ‘न समझे दिल फ़रेब-ए-आरज़ू को’, ‘na samjhe dil fareb-e-arzu ko’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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