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फ़हमीदा रियाज़ की ग़ज़लें: Fahmida Riaz Ghazal in Hindi

2024-12-07 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

फ़हमीदा रियाज़ (Fahmida Riaz) (1946–2018) उर्दू की अग्रणी प्रगतिशील कवयित्री, प्रख्यात लेखिका, नारीवादी विचारक और अनुवादक थीं। उनका जन्म मेरठ (उत्तर प्रदेश) में हुआ था और विभाजन के बाद उनका परिवार पाकिस्तान चला गया। अपनी निर्भीक और सामाजिक चेतना से ओत-प्रोत रचनाओं के लिए जानी जाने वाली फ़हमीदा रियाज़ की प्रमुख कृतियों में धूप, पत्थर की ज़बान, बदन दरीदा, गोदावरी और ख़त-ए-मरमूज़ शामिल हैं।

फ़हमीदा रियाज़ ने साहित्य और अनुवाद के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। उन्होंने फ़ारसी भाषा से मौलाना जलालुद्दीन रूमी की मसनवी का उर्दू में पद्यानुवाद किया, साथ ही सिंधी साहित्य के महान सूफी कवि शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई और शेख़ अयाज़ की चुनिंदा रचनाओं का अनुवाद भी प्रस्तुत किया। जनरल ज़िया-उल-हक़ के तानाशाही शासनकाल में उन्हें कई वर्षों तक भारत में राजनीतिक निर्वासन बिताना पड़ा। साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान के लिए वर्ष 2010 में उन्हें पाकिस्तान के प्रतिष्ठित Pride of Performance सम्मान से नवाज़ा गया।

फ़हमीदा रियाज़ की लोकप्रिय ग़ज़लें (Selected Ghazals of Fahmida Riaz)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ फ़हमीदा रियाज़ की ग़ज़लें हैं — ‘ये पैरहन जो मिरी रूह का उतर न सका’, ‘ye pairahan jo meri ruh ka utar na saka’, ‘जो मुझ में छुपा मेरा गला घोंट रहा है’, ‘jo mujh mein chhupa mera gala ghonT raha hai’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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