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फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़लें: Firaq Gorakhpuri Ghazal in Hindi

2024-12-05 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

फ़िराक़ गोरखपुरी (Firaq Gorakhpuri) (1896–1982) आधुनिक उर्दू शायरी के शिखर पुरुषों में से एक हैं। उनका असली नाम रघुपति सहाय था। 28 अगस्त 1896 को गोरखपुर में जन्मे फ़िराक़ साहब ने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से जुड़कर सरकारी सेवा छोड़ी और जेल भी गए। बाद में वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी साहित्य के प्रोफ़ेसर रहे। भारतीय संस्कृति, दर्शन और पश्चिमी साहित्य के समन्वय ने उनकी शायरी को एक अनुपम गहराई दी।

फ़िराक़ ने ग़ज़ल, नज़्म, और रुबाई विधाओं में नए सौंदर्यबोध की रचना की। उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में ‘गुल-ए-नग़मा’, ‘गुल-ए-राना’, ‘मश्अल’, ‘रूह-ए-कायनात’ और ‘रूप’ शामिल हैं। उनके अमर संग्रह ‘गुल-ए-नग़मा’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पृष्ठ पर आप फ़िराक़ गोरखपुरी की प्रमुख ग़ज़लों और प्रसिद्ध शायरी (Firaq Gorakhpuri Ghazals & Shayari in Hindi) का संग्रह पढ़ सकते हैं।

फ़िराक़ गोरखपुरी की चुनिंदा शायरी व ग़ज़लें (Selected Poetry of Firaq Gorakhpuri)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़लें हैं — ‘फ़िराक़ गोरखपुरी ग़ज़ल संग्रह (Firaq Gorakhpuri Ghazal Sangrah)’, ‘बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं (Bahut Pahle Se Un Qadmon Ki Aahat Jaan Lete Hain)’, ‘सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं (Sar Mein Sauda Bhi Nahin Dil Mein Tamanna Bhi Nahin)’, ‘सितारों से उलझता जा रहा हूँ (Sitaron Se Ulajhta Ja Raha Hun)’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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