फ़रहत एहसास : परिचय
फ़रहत एहसास आधुनिक उर्दू शायरी के चर्चित नामों में शामिल हैं। उनका जन्म 1952 में उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर ज़िले में हुआ था। उनका वास्तविक नाम फ़रहत एहसास है और वे शायर होने के साथ-साथ लेखक और संपादक के रूप में भी साहित्यिक जगत में सक्रिय रहे हैं। उनकी शायरी में पारंपरिक ग़ज़ल की ज़मीन के साथ आधुनिक जीवन की बेचैनी, प्रेम, अकेलापन, रिश्तों की जटिलता और मनुष्य के भीतर चलने वाले द्वंद्व को जगह मिलती है। वे रोज़मर्रा की भाषा और अनुभवों से ऐसे बिंब और अर्थ निकालते हैं जिनमें निजी अनुभूति के साथ व्यापक मानवीय संवेदना भी दिखाई देती है।
फ़रहत एहसास की रचनात्मक पहचान केवल ग़ज़ल तक सीमित नहीं है। उन्होंने नज़्म और दूसरी साहित्यिक विधाओं में भी लिखा है। उनकी भाषा में प्रयोगशीलता दिखाई देती है और वे परंपरागत शायरी के मुहावरों को समकालीन अनुभवों के साथ जोड़ने के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में नया ख़ाना, सुख़न में आना, अच्छी लड़की और दूसरी कविताएँ तथा रात की रानी जैसी कृतियाँ उल्लेखनीय हैं। साहित्यिक पत्रकारिता और संपादन के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है और उन्होंने उर्दू साहित्य की कई महत्वपूर्ण रचनाओं को पाठकों तक पहुँचाने का काम किया है।
फ़रहत एहसास की शायरी का आकर्षण उसकी सहजता और अर्थ की कई परतों में है। प्रेम और निजी अनुभवों से लेकर अकेलेपन तथा बदलती सामाजिक संवेदनाओं तक, उनकी रचनाएँ आधुनिक मनुष्य की जटिल अनुभूतियों को अपने विशिष्ट अंदाज़ में व्यक्त करती हैं।
Farhat Ehsas Popular Poetry & Ghazal Lyrics
- तुम्हें उस से मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते
- हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है
- ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे
- अब दिल की तरफ़ दर्द की यलग़ार बहुत है
- मैं रोना चाहता हूँ ख़ूब रोना चाहता हूँ मैं
- ये दिल दुनिया से बाज़ आने लगा है
- बहुत ज़मीन बहुत आसमाँ मिलेंगे तुम्हें
- जो इश्क़ चाहता है वो होना नहीं है आज
- राह की कुछ तो रुकावट यार कम कर दीजिए
- पूरी तरह से अब के तय्यार हो के निकले
- घर में चीज़ें बढ़ रही हैं ज़िंदगी कम हो रही है
- पैकर-ए-अक़्ल तिरे होश ठिकाने लग जाएँ
- हुई इक ख़्वाब से शादी मिरी तन्हाई की
- उम्र बे-वज्ह गुज़ारे भी नहीं जा सकते
- ख़ाक है मेरा बदन ख़ाक ही उस का होगा
- मिरी मोहब्बत में सारी दुनिया को इक खिलौना बना दिया है
- बहुत मुमकिन था हम दो जिस्म और इक जान हो जाते
- मोहब्बत चाहते हो क्यूँ वफ़ा क्यूँ माँगते हो
- तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता
- रास्ते हम से राज़ कहने लगे
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ फरहत एहसास की ग़ज़लें हैं — ‘तुम्हें उस से मोहब्बत है तो हिम्मत क्यूँ नहीं करते’, ‘हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है’, ‘ठोकरें खा के सँभलना नहीं आता है मुझे’, ‘अब दिल की तरफ़ दर्द की यलग़ार बहुत है’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।