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दाग़ देहलवी की ग़ज़लें: Daag Dehalvi Ghazal in Hindi

2026-09-10 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

उर्दू ग़ज़ल में दाग़ देहलवी (Daag Dehlvi) का नाम उस शायरी के लिए लिया जाता है जिसमें इश्क़ की बात किसी भारी-भरकम अंदाज़ में नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की बातचीत जैसी सहज भाषा में कही गई है। नवाब मिर्ज़ा ख़ाँ ‘दाग़’ (1831–1905) दिल्ली की उस शायरी की परंपरा से आए थे जिसमें भाषा, मुहावरा और कहने का ढंग बहुत महत्व रखते थे। उनके शेरों में प्रेम, रूठना-मनाना, इंतज़ार और दिल की बातें अक्सर ऐसी सादगी से आती हैं कि वे सीधे पाठक से बातचीत करते हुए लगते हैं।

दाग़ की खास पहचान उनकी मुहावरेदार दिल्ली की ज़बान, शोखी और प्रेम को सहज ढंग से कहने की कला है। यही वजह है कि उनकी ग़ज़लें अपने समय में भी खूब पसंद की गईं और आज भी पढ़ी और गाई जाती हैं। यहाँ दाग़ देहलवी की 50 सबसे मशहूर ग़ज़लों का संग्रह (Famous Ghazals of Daag Dehlvi in Hindi) प्रस्तुत है।

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का था
वो क़त्ल कर के मुझे हर किसी से पूछते हैं
ये काम किस ने किया है ये काम किस का था
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
रहा न दिल में वो बेदर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था
न पूछ-गछ थी किसी की वहाँ न आव-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतिमाम किस का था
तमाम बज़्म जिसे सुन के रह गई मुश्ताक़
कहो वो तज़्किरा-ए-ना-तमाम किस का था
हमारे ख़त के तो पुर्ज़े किए पढ़ा भी नहीं
सुना जो तू ने ब-दिल वो पयाम किस का था
उठाई क्यूँ न क़यामत अदू के कूचे में
लिहाज़ आप को वक़्त-ए-ख़िराम किस का था
गुज़र गया वो ज़माना कहूँ तो किस से कहूँ
ख़याल दिल को मिरे सुब्ह ओ शाम किस का था
हमें तो हज़रत-ए-वाइज़ की ज़िद ने पिलवाई
यहाँ इरादा-ए-शर्ब-ए-मुदाम किस का था
अगरचे देखने वाले तिरे हज़ारों थे
तबाह-हाल बहुत ज़ेर-ए-बाम किस का था
वो कौन था कि तुम्हें जिस ने बेवफ़ा जाना
ख़याल-ए-ख़ाम ये सौदा-ए-ख़ाम किस का था
इन्हीं सिफ़ात से होता है आदमी मशहूर
जो लुत्फ़ आम वो करते ये नाम किस का था
हर इक से कहते हैं क्या 'दाग़' बेवफ़ा निकला
ये पूछे उन से कोई वो ग़ुलाम किस का था

Famous Ghazal of Daag Dehlvi in Hindi (दाग़ देहलवी की प्रसिद्ध ग़ज़लें)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दाग़ देहलवी की सबसे मशहूर ग़ज़ल कौन सी है?

“तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था” उनकी सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली ग़ज़ल है, जो इस पन्ने पर पूरी दी गई है।

दाग़ देहलवी की ग़ज़लें किस भाषा में पढ़ी जा सकती हैं?

इस पन्ने पर ग़ज़लें देवनागरी में हैं, और कुछ ग़ज़लें रोमन में भी दी गई हैं ताकि गुनगुनाना आसान हो।

दाग़ देहलवी की और ग़ज़लें कहाँ मिलेंगी?

ग़ज़ल शायरी संग्रह में 80 शायरों की ग़ज़लें एक जगह हैं, वहाँ से आप आगे पढ़ सकते हैं।

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ दाग़ देहलवी की ग़ज़लें हैं — ‘तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था’, ‘ग़ज़ब किया तिरे वा'दे पे ए'तिबार किया’, ‘उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं’, ‘आप का ए'तिबार कौन करे’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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