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भारतेंदु हरिश्चंद्र की ग़ज़लें: Bharatendu Harishchandra Ghazal in Hindi

2024-11-23 · ग़ज़ल / Ghazal

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकार, कवि, नाटककार और पत्रकार थे। उनका जन्म 9 सितंबर 1850 को वाराणसी में हुआ था। उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने हिंदी गद्य और पत्रकारिता को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी रचनाओं में देशप्रेम, सामाजिक समस्याओं और तत्कालीन परिस्थितियों की स्पष्ट झलक मिलती है। अंधेर नगरी, भारत दुर्दशा और सत्य हरिश्चन्द्र उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में शामिल हैं। उन्होंने कविवचनसुधा और हरिश्चन्द्र मैगज़ीन जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का निधन 6 जनवरी 1885 को वाराणसी में हुआ।

आतिश-ए-हिज्राँ से जलाना नहीं अच्छा - Ghazal


आतिश-ए-हिज्राँ से जलाना नहीं अच्छा
ऐ शोला-रुख़ो आग लगाना नहीं अच्छा

किस गुल के तसव्वुर में है ऐ लाला जिगर-ख़ूँ
ये दाग़ कलेजे पे उठाना नहीं अच्छा

आया है अयादत को मसीहा सर-ए-बालीं
ऐ मर्ग ठहर जा अभी आना नहीं अच्छा


सोने दे शब-ए-वस्ल-ए-ग़रीबाँ है अभी से
ऐ मुर्ग़-ए-सहर शोर मचाना नहीं अच्छा

तुम जाते हो क्या जान मिरी जाती है साहिब
ऐ जान-ए-जहाँ आप का जाना नहीं अच्छा

आ जा शब-ए-फ़ुर्क़त में क़सम तुम को ख़ुदा की
ऐ मौत बस अब देर लगाना नहीं अच्छा

पहुँचा दे सबा कूचा-ए-जानाँ में पस-ए-मर्ग
जंगल में मिरी ख़ाक उड़ाना नहीं अच्छा

आ जाए न दिल आप का भी और किसी पर
देखो मिरी जाँ आँख लड़ाना नहीं अच्छा

कर दूँगा अभी हश्र बपा देखियो जल्लाद
धब्बा ये मिरे ख़ूँ का छुड़ाना नहीं अच्छा

ऐ फ़ाख़्ता उस सर्व-ए-सही क़द का हूँ शैदा
कू-कू की सदा मुझ को सुनाना नहीं अच्छा

(आतिश-ए-हिज्राँ=विरह की आग, पस-ए-मर्ग=
मौत के बाद, हश्र=प्रलय,क़यामत)

Bhartendu Harishchandra Ki Ghazals

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