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बेकल उत्साही की ग़ज़लें: Bekal Utsahi Ghazal in Hindi

2024-12-10 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

पद्मश्री बेकल उत्साही (Bekal Utsahi) (1928–2016) आधुनिक उर्दू शायरी, हिंदी गीत और लोक संस्कृति के मूर्धन्य हस्ताक्षर थे। उनका वास्तविक नाम मुहम्मद शफ़ी ख़ान था और उनका जन्म बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वर्ष 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनके ओजस्वी कलाम को सुनकर उन्हें ‘उत्साही’ नाम दिया, जो आगे चलकर उनकी साहित्यिक पहचान बन गया। वे संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) के सदस्य रहे और 1976 में साहित्य व शिक्षा के क्षेत्र में अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से विभूषित किया गया। गंगा-जमुनी तहज़ीब, राष्ट्रीय एकता और दोहों-गीतों की मिठास उनकी रचनाओं की प्रमुख विशेषता रही।

बेकल उत्साही की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Selected Ghazals of Bekal Utsahi)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ बेकल उत्साही की ग़ज़लें हैं — ‘दिमाग़ अर्श पे है ख़ुद ज़मीं पे चलते हैं’, ‘dimagh arsh pe hai KHud zamin pe chalte hain’, ‘उधर वो हाथों के पत्थर बदलते रहते हैं’, ‘udhar wo hathon ke patthar badalte rahte hain’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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