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बहादुर शाह ज़फ़र की ग़ज़लें: Bahadur Shah Zafar Ghazal in Hindi

2024-12-04 · ग़ज़ल / Ghazal / शायरी / Shayari

बहादुर शाह ज़फ़र (Bahadur Shah Zafar) का मूल नाम मिर्ज़ा अबू ज़फ़र सिराजुद्दीन मुहम्मद था। उनका जन्म 1775 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल क़िले में हुआ। वे मुग़ल सल्तनत के अंतिम बादशाह होने के साथ-साथ उर्दू अदब के युगप्रवर्तक और संवेदनशील क्लासिकल शायर थे। शायरी की तालीम उन्होंने मीरज़ा नसीर और बाद में उस्ताद-ए-शहंशाह शेख़ इब्राहीम ज़ौक़ से प्राप्त की, जबकि मिर्ज़ा असदुल्लाह ख़ाँ ग़ालिब भी उनके दरबार व साहित्यिक मंडली के शीर्ष हस्ताक्षर रहे। शायरी के अतिरिक्त ज़फ़र को सूफ़ी दर्शन, संगीत और ख़ताती (सुलेख कला) में भी विशेष महारत हासिल थी।

ज़फ़र की ग़ज़लों में इश्क़, विरह, सूफ़ी तसव्वुफ़ और सल्तनत के उजड़ने का गहरा दर्द झलकता है। उनकी मुकम्मल रचनाएँ ‘कुल्लियात-ए-ज़फ़र’ में संकलित हैं। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें बंदी बनाकर रंगून (म्यांमार) निर्वासित कर दिया, जहाँ 1862 में उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने वतन और दिल्ली से बिछड़ने की टीस उनकी शायरी के हर शेर में शिद्दत से महसूस होती है।

बहादुर शाह ज़फ़र की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Bahadur Shah Zafar Best Ghazals)

इस पन्ने की ग़ज़लें

यहाँ बहादुर शाह ज़फ़र की ग़ज़लें हैं — ‘बात करनी मुझे मुश्किल कभी ऐसी तो न थी’, ‘लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में’, ‘भरी है दिल में जो हसरत कहूँ तो किस से कहूँ’, ‘या मुझे अफ़सर-ए-शाहाना बनाया होता’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।

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