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आनंदघन के सबद : Anandghan Ji Ke Sabad

2026-09-22 · Shabad / Sabad / सबद

परिचय

आनंदघन जी 17वीं शताब्दी के महान जैन संत, दार्शनिक एवं रहस्यवादी कवि थे। जैन अध्यात्म परंपरा में उन्हें अंतर्मुखी साधना, आत्मानुभूति और शुद्ध चैतन्य रस के अद्वितीय कवि के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है। उनकी वाणी में सांसारिक मोह से विरक्ति, आत्म-जागरण तथा कबीर जैसी वैचारिक प्रखरता और मीरा जैसी अनन्य आत्मीयता का सुंदर संगम दिखाई देता है। 'आनंदघन चौबीसी' और 'आनंदघन बहोत्तरी' जैसी अमर कृतियों के माध्यम से उन्होंने हिंदी, राजस्थानी और गुजराती मिश्रित लोकभाषा में ज्ञानमार्गी भक्ति को एक नई ऊंचाई दी।

आनंदघन के सबद एवं पद

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