अखिलेश तिवारी हिंदी के कवि और रचनाकार हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम, जीवन के अनुभव, रिश्तों की संवेदनाएँ और समाज से जुड़े विषयों की झलक मिलती है। उनकी भाषा सहज और भावपूर्ण है, जिससे उनकी कविताएँ पाठकों से सीधे जुड़ती हैं। इस पृष्ठ पर अखिलेश तिवारी की चुनिंदा कविताएँ और अन्य रचनाएँ पढ़ी जा सकती हैं।
अखिलेश तिवारी की प्रमुख ग़ज़लें एवं रचनाएँ
- कहाँ तलक यूँ तमन्ना को दर-ब-दर देखूँ अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- ग़मों के नूर में लफ़्जों को ढालने निकले अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- मुलाहिज़ा हो मेरी भी उड़ान, पिंजरे में अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- Ghazals of Akhilesh Tiwari
- वक़्त कर दे न पाएमाल मुझे अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- उदास कितने थे--गजल अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- रोज़ बढती जा रही इन खाइयों का क्या करें अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- था रवानी से ही कायम उसकी हस्ती का सुबूत अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- नदी के ख़्वाब दिखायेगा तश्नगी देगा अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- ख्वाबों की बात हो न ख्यालों की बात हो अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- पानी में जो आया है तो गहरे भी उतर जा अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- हम उन सवालों को लेकर उदास कितने थे अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
- तू इश्क में मिटा न कभी दार पर गया अखिलेश तिवारी ग़ज़ल
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ अखिलेश तिवारी की ग़ज़लें हैं — ‘कहाँ तलक यूँ तमन्ना को दर-ब-दर देखूँ अखिलेश तिवारी ग़ज़ल’, ‘ग़मों के नूर में लफ़्जों को ढालने निकले अखिलेश तिवारी ग़ज़ल’, ‘मुलाहिज़ा हो मेरी भी उड़ान, पिंजरे में अखिलेश तिवारी ग़ज़ल’, ‘Ghazals of Akhilesh Tiwari’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।