अदा जाफ़री (Ada Jafri / Ada Jafa
अदा जाफ़री (Ada Jafri / Ada Jafarey) (1924–2015) उर्दू अदब की पहली प्रतिष्ठित महिला शायरा थीं, जिन्हें उर्दू शायरी की ‘प्रथम महिला’ (First Lady of Urdu Poetry) भी कहा जाता है। बदायूँ (उत्तर प्रदेश) में जन्मी अदा जाफ़री ने परंपरावादी दौर में महिला अनुभूतियों, आत्मसम्मान, प्रेम, विरह, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक सरोकारों को बेबाक व नफ़ीस आवाज़ दी। उनकी रचनाओं में सादगी, गहरा दर्द और शास्त्रीय नज़ाकत का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। इस संग्रह में उनकी चुनिंदा और मशहूर ग़ज़लें प्रस्तुत हैं।अदा जाफ़री की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Popular Ghazals of Ada Jafri)
arey) (1924–2015) उर्दू अदब की पहली प्रतिष्ठित महिला शायरा थीं, जिन्हें उर्दू शायरी की ‘प्रथम महिला’ (First Lady of Urdu Poetry) भी कहा जाता है। बदायूँ (उत्तर प्रदेश) में जन्मी अदा जाफ़री ने परंपरावादी दौर में महिला अनुभूतियों, आत्मसम्मान, प्रेम, विरह, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक सरोकारों को बेबाक व नफ़ीस आवाज़ दी। उनकी रचनाओं में सादगी, गहरा दर्द और शास्त्रीय नज़ाकत का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। इस संग्रह में उनकी चुनिंदा और मशहूर ग़ज़लें प्रस्तुत हैं।
अदा जाफ़री की प्रसिद्ध ग़ज़लें (Popular Ghazals of Ada Jafri)
- अदा जाफ़री की ग़ज़लें : Ghazals by Ada Jafri
- हाल खुलता नहीं जबीनों से
- गुलों सी गुफ़्तुगू करें
- गुलों को छू के शमीम-ए-दुआ
- आलम ही और था
- अचानक दिल-रुबा मौसम का
- दीप था या तारा क्या जाने
- जो चराग़ सारे बुझा चुके उन्हें इंतिज़ार कहाँ रहा
- हर गाम सँभल सँभल रही थी
- घर का रस्ता भी मिला था शायद
- कोई संग-ए-रह भी चमक उठा
- शायद अभी है राख में कोई शरार भी
इस पन्ने की ग़ज़लें
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