आलोक श्रीवास्तव : परिचय
आलोक श्रीवास्तव समकालीन हिंदी साहित्य के चर्चित कवि और ग़ज़लकार हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के भोपाल में हुआ। कविता और ग़ज़ल के साथ-साथ वे लेखन, पत्रकारिता और साहित्यिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। उनकी रचनाओं में आधुनिक जीवन के अनुभवों को सहज और बोलचाल की भाषा में अभिव्यक्त करने की विशेषता दिखाई देती है।
उनका प्रमुख ग़ज़ल-संग्रह आमीन है, जिसे हिंदी ग़ज़ल के पाठकों के बीच विशेष पहचान मिली। उनकी कई ग़ज़लें और कविताएँ साहित्यिक मंचों तथा काव्य-पाठों में भी प्रस्तुत की जाती रही हैं। उनकी रचनाओं का पाठ और मंचीय प्रस्तुति से जुड़ाव उनकी लोकप्रियता का एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
Aalok Shrivastav Poetry & Ghazal Lyrics
- ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं
- ye sochna ghalat hai ki tum par nazar nahin
- घर की बुनियादें दीवारें बाम-ओ-दर थे बाबू जी
- ghar ki buniyaaden diwaren baam-o-dar the babu ji
- तुम्हारे पास आते हैं तो साँसें भीग जाती हैं
- tumhaare pas aate hain to sansen bhig jati hain
- वही आँगन वही खिड़की वही दर याद आता है
- wahi aangan wahi khiDki wahi dar yaad aata hai
- धड़कते साँस लेते रुकते चलते मैं ने देखा है
- dhaDakte sans lete rukte chalte maine dekha hai
- अगर सफ़र में मिरे साथ मेरा यार चले
- agar safar mein mere sath mera yar chale
- ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम
- ye aur baat dur rahe manzilon se hum
- जब भी तक़दीर का हल्का सा इशारा होगा
- jab bhi taqdir ka halka sa ishaara hoga
- हर बार हुआ है जो वही तो नहीं होगा
- har bar hua hai jo wahi to nahin hoga
- हमेशा ज़िंदगी की हर कमी को जीते रहते हैं
- hamesha zindagi ki har kami ko jite rahte hain
- जिन बातों को कहना मुश्किल होता है
- jin baaton ko kahna mushkil hota hai
- धूप हुई तो आँचल बन कर कोने कोने छाई अम्माँ
- dhup hui to aanchal ban kar kone kone chhai amman
- ये और बात दूर रहे मंज़िलों से हम
- ye aur baat dur rahe manzilon se hum
- मुझे सिरे से पकड़ कर उधेड़ देती है
- mujhe sire se pakaD kar udheD deti hai
- मंज़िल पे ध्यान हम ने ज़रा भी अगर दिया
- manzil pe dhyan humne zara bhi agar diya
इस पन्ने की ग़ज़लें
यहाँ आलोक श्रीवास्तव की ग़ज़लें हैं — ‘ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं’, ‘ye sochna ghalat hai ki tum par nazar nahin’, ‘घर की बुनियादें दीवारें बाम-ओ-दर थे बाबू जी’, ‘ghar ki buniyaaden diwaren baam-o-dar the babu ji’ जैसी ग़ज़लें, हर एक का लिंक ऊपर दिया है।