विनोद कुमार शुक्ल का परिचय
समकालीन हिंदी साहित्य के मूर्धन्य कवि और कथाकार विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को राजनांदगांव (वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ। वे अपनी विशिष्ट, जादुई यथार्थ से परिपूर्ण शैली और दैनिक जीवन की सूक्ष्म संवेदनाओं को सहजता से उकेरने के लिए जाने जाते हैं। उनकी प्रमुख काव्य कृतियों में 'सब कुछ होना बचा रहेगा', 'लगभग जयहिंद', 'वह आदमी नया गरम कोट पहिनकर चला गया विचार की तरह' तथा उपन्यासों में 'नौकर की कमीज़' और 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' मील का पत्थर मानी जाती हैं। साहित्य में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार, शिखर सम्मान तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पेन/नाबोकोव अवार्ड (PEN/Nabokov Award) से सम्मानित किया जा चुका है।
विनोद कुमार शुक्ल की प्रसिद्ध कविताएँ
- अपने अकेले होने को / विनोद कुमार शुक्ल
- अब इस उम्र में हूँ / विनोद कुमार शुक्ल
- अब कभी मिलना नहीं होगा ऎसा था / विनोद कुमार शुक्ल
- अभी तक बारिश नहीं हुई / विनोद कुमार शुक्ल
- आकाश की तरफ़ / विनोद कुमार शुक्ल
- आकाश से उड़ता हुआ / विनोद कुमार शुक्ल
- उपन्यास में पहले एक कविता रहती थी / विनोद कुमार शुक्ल
- एक अजनबी पक्षी / विनोद कुमार शुक्ल
- कहीं जाने का मन होता है / विनोद कुमार शुक्ल
- कक्षा के काले तख़्ते पर सफ़ेद चाक से बना / विनोद कुमार शुक्ल
- कोई अधूरा पूरा नहीं होता / विनोद कुमार शुक्ल
- घर-बार छोड़कर संन्यास नहीं लूंगा / विनोद कुमार शुक्ल
- चार पेड़ के / विनोद कुमार शुक्ल
- जगह-जगह रुक रही थी यह गाड़ी / विनोद कुमार शुक्ल
- जब बाढ़ आती है / विनोद कुमार शुक्ल
- जब मैं भीम बैठका देखने गया / विनोद कुमार शुक्ल
- जितने सभ्य होते हैं / विनोद कुमार शुक्ल
- तीनों, और चौथा केन्द्र में / विनोद कुमार शुक्ल
- पहाड़ को बुलाने / विनोद कुमार शुक्ल