परिचय
नागार्जुन (1911–1998) हिंदी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि, लेखक और जनकवि थे। उनका पूरा नाम वैद्यनाथ मिश्र था, जबकि मैथिली में वे यात्री नाम से भी लिखते थे। उनका जन्म बिहार के मधुबनी ज़िले के सतलखा गाँव में हुआ था। उन्होंने हिंदी और मैथिली दोनों भाषाओं में कविता और साहित्य की रचना की तथा संस्कृत, पाली और बांग्ला का भी अध्ययन किया। उनकी कविताओं में गाँव-गाँव का जीवन, किसान-मजदूर, गरीबी, राजनीति, प्रकृति और आम लोगों की परेशानियों की तस्वीर मिलती है। सरल, बोलचाल की भाषा और बेबाक अंदाज़ उनकी रचनाओं की खास पहचान है। युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, प्यासी पथराई आँखें और बलचनमा उनकी चर्चित कृतियों में शामिल हैं।
जनकवि नागार्जुन की प्रसिद्ध कविताएँ एवं रचना संग्रह
- बादल को घिरते देखा
- अकाल और उसके बाद
- कालिदास
- गुलाबी चूड़ियाँ
- सिंदूर तिलकित भाल
- उनको प्रणाम!
- आओ रानी, हम ढोएँगे पालकी
- हरिजन-गाथा
- तकली मेरे साथ रहेगी
- तीनों बंदर बापू के
- तीनों बंदर बापू के
- बहुत दिनों के बाद
- सिके हुए दो भुट्टे
- वह दंतुरित मुस्कान (एन.सी. ई.आर.टी)
- वह दंतुरित मुस्कान (एन.सी. ई.आर.टी)
- मेरी भी आभा है इसमें
- फूले कदंब
- बाघ आया उस रात
- बाघ आया उस रात
- कल्पना के पुत्र हे भगवान
- जी हाँ, लिख रहा हूँ...
- मंत्र कविता
- महाकवि निराला
- चंदू, मैंने सपना देखा
- प्रतिहिंसा ही स्थायी भाव है
- खटमल
- मैं मिलिट्री का बूढ़ा घोड़ा
- गांधी
- भारतेंदु
- ओ जन-मन के सजग चितेरे
- सुबह-सुबह
- रहा उनके बीच मैं
- तन गई रीढ़
- रवि ठाकुर!
- पथरीला शिल्प
- प्रतिबद्ध
- ऋतु-संधि
- सौदा