राजकमल चौधरी (1933–1967) हिंदी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि, कथाकार और लेखक थे। उनका जन्म बिहार के सहरसा ज़िले के महिषी गाँव में हुआ था। उन्होंने कविता, कहानी और उपन्यास—तीनों विधाओं में लिखा। उनकी रचनाओं में जीवन की कड़वी सच्चाइयाँ, रिश्तों की उलझन, अकेलापन और उस समय के समाज की तस्वीर दिखाई देती है। हिंदी और मैथिली साहित्य में अपने अलग तेवर और बेबाक लेखन के कारण राजकमल चौधरी की विशेष पहचान बनी। उनकी प्रमुख कृतियों में मुक्ति प्रसंग, कंकावती, मछली मरी हुई और देहगाथा शामिल हैं।
राजकमल चौधरी की प्रसिद्ध कविताएँ एवं रचना
- परिचय
- शव-यात्रा का मृत संगीत
- वेश्याएँ
- ऋतु शृंगार में खंडित नायिकाएँ
- नींद में भटकता हुआ आदमी
- रात्रिदग्ध एकालाप
- चाय के प्याले में
- कवि-कर्म
- पितृ-ऋण
- ऑडिट रिपोर्ट
- वापसी
- पहली कविता की आख़िरी शाम
- किधर से चढ़ेंगे आप?
- आधी नींद में पूरी बातचीत
- वासना
- समाजशास्त्र
- आधी रात के उपरांत एक रसिक स्त्री
- रिक्शे पर एक सौ रातें
- दिल्ली शहर में आइसक्रीम ख़रीदते हुए
- विघटन
- लज्जावती
- अकाल का पहला दिन
- चिंता अर्थहीन बेबसी
- अनायास
- अगस्त '65 की आख़िरी कविता
- बुख़ार में घर लौटकर