लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

Sur Sukhsagar Surdas Ji : सूर सुखसागर सूरदास जी रचित

2025-07-25 · हिंदी कविता / Hindi Poetry

भक्त कवि सूरदास का परिचय

हिंदी साहित्य के भक्तिकाल की सगुण कृष्णकाव्य धारा के शीर्षस्थ कवि और अष्टछाप के प्रधान स्तंभ महाकवि सूरदास का जन्म 1478 ईस्वी में रुनकता (आगरा-मथुरा मार्ग) अथवा सीही नामक ग्राम में माना जाता है तथा 1583 ईस्वी में पारसौली में उनका तिरोधान हुआ। महाप्रभु वल्लभाचार्य के अनन्य शिष्य सूरदास जी ने ब्रजभाषा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, वात्सल्य, माधुर्य और वियोग शृंगार का ऐसा अद्वितीय व सजीव वर्णन किया कि वे 'पुष्टिमार्ग का जहाज़' और 'वात्सल्य रस के सम्राट' कहलाए। उनकी अमर रचनाओं में 'सूरसागर', 'सूरसारावली' और 'साहित्य-लहरी' सर्वोपरि हैं। उनकी विलक्षण काव्य-प्रतिभा के कारण ही संपूर्ण हिंदी साहित्य आकाश में उन्हें "सूर सूर तुलसी ससी" कहकर सर्वोच्च कवि रूपी सूर्य की संज्ञा दी गई है।

सूर सागर: प्रमुख लीलाएं और पद

इन रचनाओं को भी पढ़िए

हिंदी कविताHindi PoetrySur Sukhsagar Surdas Jiसूर सुखसागर सूरदास जी रचितSukhsagarSurdas
← सभी रचनाएँ