श्रीकांत वर्मा का परिचय
नई कविता और साठोत्तरी हिंदी साहित्य के मूर्धन्य कवि, आलोचक और सांसद श्रीकांत वर्मा का जन्म 18 सितंबर 1931 को बिलासपुर (वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ था तथा 25 मई 1986 को न्यूयॉर्क में उनका निधन हुआ। उन्होंने राजनीति, सत्ता के चरित्र और मानव नियति के द्वंद्व को अपनी धारदार भाषा और विशिष्ट ऐतिहासिक रूपकों के जरिए अभूतपूर्व ढंग से उजागर किया। उनकी कालजयी काव्य कृतियों में 'मगध', 'जलसाघर', 'भटका मेघ', 'मायादर्पण' और 'दिनारंभ' मील का पत्थर मानी जाती हैं। हिंदी कविता को वैश्विक संवेदनशीलता और नवीन शिल्प प्रदान करने के लिए उन्हें मरणोपरांत वर्ष 1987 के साहित्य अकादेमी पुरस्कार के अलावा 'मध्य प्रदेश तुलसी सम्मान' और 'शिखर सम्मान' से विभूषित किया गया।
श्रीकांत वर्मा की प्रमुख कविताएँ
- काशी में शव / श्रीकांत वर्मा
- एक और ढंग / श्रीकांत वर्मा
- एक मुर्दे का बयान / श्रीकांत वर्मा
- मगध के लोग / श्रीकांत वर्मा
- फागुन / श्रीकांत वर्मा
- स्वरों का समर्पण / श्रीकांत वर्मा
- महामहिम / श्रीकांत वर्मा
- कुछ का व्यवहार बदल गया / श्रीकांत वर्मा
- बुखार में कविता / श्रीकांत वर्मा
- हस्तक्षेप / श्रीकांत वर्मा
- ट्राय का घोड़ा / श्रीकांत वर्मा