परिचय
शमशेर बहादुर सिंह (1911–1993) हिंदी के प्रमुख आधुनिक कवि और साहित्यकार थे। वे नई कविता के महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में प्रेम, सौंदर्य, प्रकृति, मानवीय संवेदना और सामाजिक यथार्थ का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। शमशेर की भाषा में हिंदी और उर्दू का सुंदर मेल मिलता है, जिससे उनकी काव्य-शैली को विशेष पहचान मिली। उनकी कविता में चित्रकार जैसी सूक्ष्म दृष्टि और बिंबों की सुंदरता दिखाई देती है। ‘कुछ कविताएँ’, ‘कुछ और कविताएँ’ और ‘चुका भी हूँ नहीं मैं’ उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं। आधुनिक हिंदी कविता में शमशेर बहादुर सिंह का स्थान अत्यंत विशिष्ट है।
शमशेर बहादुर सिंह की प्रसिद्ध कविताएं एवं काव्य संग्रह
- टूटी हुई, बिखरी हुई
- हमारे सिवा इनका रस कौन जाने!
- प्रेम
- प्रेम
- रात्रि
- लौट आ, ओ धार
- उषा
- उषा
- चुका भी हूँ मैं नहीं!
- बात बोलेगी
- बाबा हमारे, नागार्जुन बाबा
- ईश्वर अगर मैंने अरबी में प्रार्थना की
- नेरूदा
- आओ
- अम्न का राग
- चाँद से थोड़ी-सी गप्पें
- चाँद से थोड़ी-सी गप्पें
- कत्थई गुलाब
- ओ मेरे घर
- काव्य संकलन
- एक पीली शाम
- चिकनी चाँदी-सी माटी
- वह सलोना जिस्म
- तुमने मुझे
- निराला के प्रति
- काल, तुझसे होड़ है मेरी
- लेकर सीधा नारा
- अज्ञेय से
- तुमको पाना है अविराम
- सूना-सूना पथ है, उदास झरना
- ये लहरें घेर लेती हैं
- एक आदमी दो पहाड़ों को कुहनियों से ठेलता
- सुबह
- एक ठोस बदन अष्टधातु का-सा
- स्थिर है शव-सी बात
- काव्य पाठ
- मुझको मिलते हैं अदीब और कलाकार बहुत
- वाम वाम वाम दिशा
- ‘निशा निमंत्रण’ के कवि से
- सींग और नाख़ून
- एक नीला आईना बेठोस
- शिला का ख़ून पीती थी