लोकगीत फिल्मी गीत भजन हिंदी कविता जैन भजन ग़ज़ल सवैया-कवित्त-पद शबद दोहे गीत लिरिक्स कलम-काफ़िया बाल साहित्य सभी श्रेणियाँ

ज्ञानेन्द्रपति की कविताएँ | Gyanendrapati Kavita Sangrah

2025-08-14 · हिंदी कविता / Hindi Poetry

परिचय

श्री हठी जी भक्तिकाल एवं रीतिकाल की राधावल्लभीय संप्रदाय परंपरा के अत्यंत भावुक और प्रतिष्ठित संत-कवि थे। वे श्री हरिवंश महाप्रभु की अनन्य उपासना और निकुंज रस के अनन्य उपासक माने जाते हैं, जिनकी अमर कृति 'राधा सुधा शतक' साहित्य जगत में प्रसिद्ध है। इनकी रचनाओं में श्रीराधा रानी की नित्य लाड़-लड़ावनी लीला, अलौकिक रूप-सौंदर्य और अनन्य शरणागति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। ब्रजभाषा के सवैया और दोहों में रचित इनकी पदावली में माधुर्य, भक्ति और काव्य-सौष्ठव का अद्वितीय प्रवाह है।

श्री हठी जी की प्रमुख रचनाएँ, दोहे व सवैया

इन रचनाओं को भी पढ़िए

हिंदी कविताHindi Poetryज्ञानेन्द्रपति की कविताएँGyanendrapati Kavita Sangrahज्ञानेन्द्रपतिGyanendrapatiKavitaSangrah
← सभी रचनाएँ