मूल नाम गोपाल बहादुर सिंह; फ़िल्मों में लगभग 400 धार्मिक गीत लिखे। गोपालसिंह नेपाली का जन्म चम्पारन जिले के बेतिया नामक स्थान पर कालीबाग दरबार के नेपाली महल में हुआ था। इन्होंने प्रवेशिका तक शिक्षा प्राप्त की, कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया और फिल्मों के गीत लिखे। कविता क्षेत्र में नेपाली ने देश-प्रेम, प्रकृति-प्रेम तथा मानवीय भावनाओं का सुंदर चित्रण किया है। मुख्य काव्य संग्रह हैं- 'उमंग, 'पंछी, 'रागिनी तथा 'नीलिमा। १९३२ में उन्होंने 'प्रभात' और 'मुरली' नाम से क्रमशः हिन्दी और अंग्रेज़ी में हस्तलिखित पत्रिकाएँ भी निकालीं। मंचों के हिट कवि। उन्हें "गीतों का राजकुमार" कहा जाता था। १९६३ में मात्र ५२ वर्ष की उम्र में भागलपुर रेलवे स्टेशन पर देहांत।
गोपाल सिंह नेपाली की प्रमुख कविताएं एवं गीत
- हिंदी है भारत की बोली / कविता / गोपाल सिंह नेपाली
- इस रिमझिम में चाँद हँसा है
- मेरा देश बड़ा गर्वीला
- वसंत गीत / कविता / गोपाल सिंह नेपाली
- बाबुल तुम बगिया के तरुवर
- दीपक जलता रहा रातभर
- हिमालय और हम
- युगांतर
- स्वतंत्रता का दीपक / कविता / गोपाल सिंह नेपाली
- तुम आग पर चलो
- वो हैं बंद लिफाफा पर हम तो खुली किताब हैं मौला
- सुनो
- लघु सरिता
- शासन चलता तलवार से
- हिमालय ने पुकारा
- रुबाई / गोपाल सिंह नेपाली
- मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ
- आ रहे तुम बनकर मधुमास
- नई उमरिया प्यासी है
- भाई-बहन / कविता / गोपाल सिंह नेपाली
- नवीन कल्पना करो
- उस पार
- यह दिया बुझे नहीं
- प्रार्थना बनी रही
- गरीब का सलाम ले
- मेरा धन है स्वाधीन क़लम
- मेरी दुल्हन सी रातों को
- अपनेपन का मतवाला
- मुसकुराती रही कामना
- कुछ ऐसा खेल रचो साथी
- दो प्राण मिले / कविता / गोपाल सिंह नेपाली
- दूर जाकर न कोई बिसारा करे / ग़ज़ल / गोपाल सिंह नेपाली
- मुक्तक / गोपाल सिंह नेपाली
- तू पढ़ती है मेरी पुस्तक
- तारे चमके, तुम भी चमको / कविता / गोपाल सिंह नेपाली
- मैं प्यासा भृंग जनम भर का
- कवि की बरसगाँठ
- चौपाटी का सूर्यास्त
- यह दिल खोल तुम्हारा हँसना
- पीपल
- होली / कविता / गोपाल सिंह नेपाली