परिचय
गजानन माधव मुक्तिबोध (1917–1964) हिंदी के प्रमुख आधुनिक कवि, लेखक और आलोचक थे। वे नई कविता आंदोलन के महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक विषमता, राजनीतिक व्यवस्था, मध्यवर्गीय जीवन, आत्मसंघर्ष और मानवीय संवेदना जैसे विषय प्रमुखता से उभरते हैं। मुक्तिबोध की कविता में गहरी वैचारिकता के साथ-साथ जटिल बिंबों और प्रतीकों का प्रयोग मिलता है। ‘अँधेरे में’, ‘ब्रह्मराक्षस’ और ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ उनकी चर्चित रचनाओं में शामिल हैं। हिंदी की आधुनिक कविता को नई दिशा देने वाले कवियों में मुक्तिबोध का विशेष स्थान है।
रचनाएं : कविताएं
- मैं तुम लोगों से दूर हूँ
- अँधेरे में
- ब्रह्मराक्षस
- चाँद का मुँह टेढ़ा है
- मुझे क़दम-क़दम पर
- सहर्ष स्वीकारा है
- मैं उनका ही होता
- मैं उनका ही होता
- भूल-ग़लती
- डूबता चाँद कब डूबेगा
- विचार आते हैं
- पूँजीवादी समाज के प्रति
- ओ काव्यात्मन् फणिधर!
- मुझे पुकारती हुई पुकार
- चकमक की चिनगारियाँ
- एक भूतपूर्व विद्रोही का आत्म-कथन
- बेचैन चील
- एक अंत:कथा
- दिमाग़ी गुहांधकार का ओराँगउटाँग!
- अंत:करण का आयतन
- लकड़ी का रावण
- मेरे सहचर मित्र