हिंदवी साहित्य के शिखर पुरुष अमीर खुसरो (Amir Khusro) की रचनाएँ भारतीय संस्कृति और सूफियाना अंदाज़ का अद्भुत मेल हैं। उनकी पहेलियाँ और "छाप तिलक सब छीनी रे" जैसे कालजयी गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं। यहाँ खुसरो की पहेलियों, कह-मुकरियों, सूफी दोहों और कव्वालियों का सबसे बड़ा संग्रह दिया गया है। अपनी पसंदीदा रचना पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:
अमीर खुसरो साहित्य कोश (विषय सूची)
खुसरो की पहेलियाँ और काव्य रूप
- प्रसिद्ध पहेलियाँ (Amir Khusro Paheliyan)
- कह-मुकरियाँ (Kah-Mukariyan)
- लोकप्रिय दोहे (Hindi Dohe)
- सूफ़ी दोहे (Sufi Poetry)
- ढकोसले और अनमेलियाँ
- उलटबाँसियाँ (Ulta-Bansiyan)
मशहूर गीत और कविताएँ (हिंदी में)
- आज रंग है ऐ माँ रंग है री
- चल खुसरो घर आपने (प्रसिद्ध दोहा)
- बहुत कठिन है डगर पनघट की
- सकल बन फूल रही सरसों
- छाप तिलक सब छीनी रे
- ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल