बंगाल के राजा कृष्णचंद्र के दरबार में बारहमासी हँसी का ठिकाना था — उनके दीवान गोपाल भाँड़। राजा तंत्री-मंत्री सब उनकी अक्ल के किस्से सुनकर हँसते-हँसते थकते नहीं थे। ये कहानियाँ हँसी के साथ चतुराई का सबक देती हैं, और बंगाल से निकलकर पूरे भारत में लोकप्रिय हो गईं। नीचे सभी कहानियों की सूची दी गई है।
| क्रम | कहानी का शीर्षक |
|---|---|
| — | गोपाल भाँड़ की सभी कहानियाँ (एक जगह) |
| 1 | अतिथि की भाषा |
| 2 | कटहल पाने की तरक़ीब |
| 3 | गुण का महत्त्व |
| 4 | गोपाल का इलाज |
| 5 | गोपाल ने नापी धरती |
| 6 | चार मूर्ख |
| 7 | पंचायत के पंचों का फैसला |
| 8 | प्रथम पुरुष |
| 9 | भविष्यवाणी |
| 10 | मन के लड्डू |
| 11 | मुख बंद रखने की कीमत |
| 12 | रंक से राजा |
| 13 | रास्ते का पत्थर |
| 14 | सबसे अच्छा कौन ? |
| 15 | समोसे की कहानी |
| 16 | सुखदामणि |